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खरसिया की स्वीकृत सड़कें बजट से विलोपित होने का कांग्रेस का आरोप

सुशासन तिहार में लिए गए आवेदनों पर एक साल बाद भी काम नहीं, भालूनारा-राबर्टसन मार्ग समेत कई सड़कों को लेकर उठे सवाल

खरसिया। खरसिया विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण और विकास कार्यों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ के प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार पर खरसिया क्षेत्र की स्वीकृत सड़कों को बजट से विलोपित किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2025 में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों से सड़क और विकास कार्यों से संबंधित आवेदन लिए थे, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी कई मांगें धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।

डनसेना ने लोक निर्माण विभाग के विभिन्न सरकारी पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कुछ सड़क निर्माण कार्य पहले बजट में शामिल किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें बजट से विलोपित कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

भालूनारा-राबर्टसन सड़क को लेकर सबसे बड़ा सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक ग्राम बड़े डूमरपाली के गुलशन कुमार और नवागांव के रामेश्वर प्रसाद ने सुशासन तिहार के दौरान भालूनारा से राबर्टसन रेलवे स्टेशन/साइडिंग तक सड़क निर्माण की मांग रखी थी।

लोक निर्माण विभाग की ओर से दिए गए जवाब का हवाला देते हुए डनसेना ने कहा कि राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा मार्ग का निर्माण कार्य बजट वर्ष 2023-24 में शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान में यह कार्य विलोपित बताया जा रहा है।

कांग्रेस के अनुसार इस सड़क की लंबाई करीब 7.50 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 26 करोड़ रुपये है। अब इस सड़क के लिए राशि को प्रथम अनुपूरक बजट 2025-26 में शामिल किए जाने हेतु प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही जा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब सड़क पहले ही बजट में शामिल थी, तो उसे बाद में विलोपित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि सरकार को सड़क निर्माण की आवश्यकता और उपयोगिता पहले से ज्ञात थी, तो बजट से हटाने के बाद दोबारा प्रस्ताव भेजने की स्थिति क्यों बनी?

कई अन्य सड़कों को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

डनसेना ने खरसिया विधानसभा क्षेत्र की अन्य प्रस्तावित अथवा स्वीकृत सड़कों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इनमें—

  • सिंघनपुर से बरभौना-चंद्रशेखरपुर-ऐडू मार्ग — 22.30 किमी, अनुमानित लागत करीब 15.60 करोड़ रुपये
  • सोनबरसा से कलमी मार्ग — 4.50 किमी, अनुमानित लागत करीब 4.50 करोड़ रुपये
  • नवागांव से रजघट्टा मार्ग — 2 किमी, अनुमानित लागत करीब 2 करोड़ रुपये
  • गोरपार से खड़गांव मार्ग — 2.10 किमी, अनुमानित लागत करीब 2.005 करोड़ रुपये
  • सोनबरसा पहुंच मार्ग — 1.50 किमी, अनुमानित लागत करीब 1.50 करोड़ रुपये

को लेकर कांग्रेस ने सरकार और लोक निर्माण विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

“आवेदन लिए, प्रचार किया, लेकिन सड़कें अब भी कागजों में”

कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने आरोप लगाया कि सुशासन तिहार के दौरान सरकार ने ग्रामीणों से बड़ी संख्या में आवेदन लिए और सड़क एवं विकास कार्यों को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। लेकिन एक साल बाद भी कई मामलों में निर्माण कार्य शुरू होने के बजाय सरकारी पत्राचार ही जारी है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि जनता की मांगों को स्वीकार कर उन्हें सरकारी प्रक्रिया में शामिल किया गया था, तो उन कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा क्यों नहीं कराया गया।

डनसेना का कहना है कि ग्रामीणों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और व्यापार से जुड़ी बुनियादी जरूरत है। ऐसे में स्वीकृत अथवा प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं को लंबित रखना सीधे तौर पर ग्रामीणों की परेशानियों को बढ़ाता है।

विधायक उमेश पटेल के प्रयासों का भी कांग्रेस ने किया उल्लेख

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि खरसिया विधायक उमेश पटेल क्षेत्र की सड़कों और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार उठाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि खरसिया विधानसभा क्षेत्र की स्वीकृत सड़कें बजट से विलोपित होती हैं या निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ता, तो यह क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि संबंधित सड़क परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-सी सड़क किस बजट में स्वीकृत हुई, किन कारणों से विलोपित हुई और अब उसके निर्माण के लिए क्या प्रक्रिया चल रही है।

निर्माण शुरू नहीं हुआ तो सड़क पर उतरेगी कांग्रेस

तारेन्द्र डनसेना ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विलोपित सड़क परियोजनाओं के लिए तत्काल राशि स्वीकृत कर जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो कांग्रेस क्षेत्र की जनता के साथ आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के नाम पर केवल आश्वासन और सरकारी पत्राचार से ग्रामीणों की समस्या दूर नहीं होगी। जनता को अब कागजों पर स्वीकृति नहीं, बल्कि धरातल पर सड़क चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

शासन का पक्ष सामने आना बाकी

कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर समाचार जारी किए जाने तक प्रदेश सरकार अथवा लोक निर्माण विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में बजट से सड़क कार्यों के विलोपन के कारण, वर्तमान स्थिति और अनुपूरक बजट में प्रस्ताव भेजे जाने की प्रक्रिया को लेकर विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल खरसिया की सड़कों का मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ग्रामीणों की बुनियादी जरूरत और विकास के वादों की जमीनी हकीकत का सवाल बन गया है।

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