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84 करोड़ की सड़क, 50 करोड़ सिर्फ भू-अर्जन में! मेडिकल कॉलेज रोड के चौड़ीकरण पर अटकी सरकार की मंजूरी

रायगढ़। मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने वाली प्रमुख सड़क के चौड़ीकरण का प्रस्ताव अब भारी-भरकम भू-अर्जन लागत के कारण सरकारी मंजूरी के इंतजार में अटक गया है। पीडब्ल्यूडी ने अतरमुड़ा से मेडिकल कॉलेज के आगे मंदिर तक करीब 3.7 किलोमीटर सड़क को 20 मीटर चौड़ा करने के लिए कुल 84 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें करीब 50 करोड़ रुपये अकेले भू-अर्जन पर खर्च होने का अनुमान है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर रायगढ़ शहर की प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण की योजना तैयार की गई थी। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी ने नापजोख और सर्वे के बाद प्रस्ताव बनाकर प्रशासकीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा है। हालांकि, कम लंबाई की सड़क के लिए भू-अर्जन पर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण प्रस्ताव पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकारी जमीन पर भी बन गए निर्माण

मेडिकल कॉलेज रोड के दोनों ओर सरकारी और आवंटित जमीनों पर बड़ी संख्या में निर्माण हो चुके हैं। कई स्थानों पर मकान, दुकानें, शोरूम और पेट्रोल पंप जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी विकसित हो गए हैं। बताया जा रहा है कि कई निर्माण ऐसे भी हैं, जिनके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। इसके बावजूद समय रहते इन्हें रोकने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अब सड़क चौड़ीकरण के दौरान इन निर्माणों और जमीनों को अधिग्रहित करने की स्थिति बन रही है। यही वजह है कि भू-अर्जन की लागत करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

पहले 25 मीटर चौड़ी करने की योजना थी

यह सड़क पहले पीएमजीएसवाई के अंतर्गत थी, जिसे अब चौड़ीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी को दिया गया है। प्रारंभिक प्रस्ताव में सड़क को 25 मीटर चौड़ा करने की योजना थी, जिसके लिए भू-अर्जन पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। लागत कम करने के उद्देश्य से सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई घटाकर 20 मीटर कर दी गई। इसके बावजूद पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 84 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

जब सड़क चौड़ी होनी थी तो निर्माण की अनुमति क्यों?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहा है। मेडिकल कॉलेज वर्षों से संचालित है और यहां आने-जाने के लिए यह सड़क महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क के भविष्य में चौड़ीकरण की आवश्यकता भी लंबे समय से सामने थी।

इसके बावजूद सड़क के दोनों ओर निर्माण गतिविधियां बढ़ती रहीं। आवंटित जमीनों की खरीद-बिक्री हुई, मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बने और कई जगह नए निर्माण भी होते रहे। यदि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण प्रस्तावित था, तो समय रहते निर्माण पर नियंत्रण क्यों नहीं किया गया?

अब उन्हीं जमीनों और निर्माणों के अधिग्रहण के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करने की नौबत आ गई है।

मामला सिर्फ 84 करोड़ रुपये की सड़क का नहीं, बल्कि इस सवाल का भी है कि जिस सड़क को भविष्य में चौड़ा किया जाना तय था, उसके दोनों ओर निर्माण को समय रहते नियंत्रित क्यों नहीं किया गया। यदि नियोजन और अनुमति प्रक्रिया में पहले ही सावधानी बरती जाती, तो आज भू-अर्जन पर खर्च होने वाली इतनी बड़ी राशि को काफी हद तक बचाया जा सकता था।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri