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15 साल की बदहाली के बाद जागा प्रशासन, 1 अक्टूबर से राबर्टसन-भालूनारा सड़क निर्माण का लिखित भरोसा

गड्ढों में नहाकर युवाओं ने जताया विरोध, नवापारा हाईस्कूल के बच्चों ने भी उठाई आवाज; विधायक उमेश पटेल के पहुंचने के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों से की बातचीत, एसडीएम के लिखित आश्वासन पर धरना स्थगित

खरसिया। राबर्टसन-भालूनारा सड़क की बदहाली को लेकर पिछले कई वर्षों से चली आ रही ग्रामीणों की नाराजगी आखिरकार आंदोलन के रूप में सामने आई और प्रशासन को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत करनी पड़ी। करीब 15 वर्षों से जर्जर सड़क, गहरे गड्ढों, बारिश में जलभराव और कीचड़ की समस्या झेल रहे ग्रामीणों ने इस बार अपना विरोध अलग अंदाज में दर्ज कराया। सड़क के गड्ढों में नहाकर युवाओं ने व्यवस्था को आईना दिखाया, जिसके बाद नवापारा हाईस्कूल के बच्चों ने भी सड़क की दुर्दशा के खिलाफ आवाज बुलंद की। मामला बढ़ा तो ग्रामीण धरने पर बैठ गए।

लगातार जारी विरोध के बीच गुरुवार को आंदोलन स्थल पर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गईं। खरसिया विधायक उमेश पटेल ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और सड़क निर्माण की मांग को गंभीरता से उठाया। विधायक के आंदोलन स्थल पर पहुंचने से ग्रामीणों को भी समर्थन मिला और उनका आंदोलन और मजबूत हुआ।

ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने पहुंचे एसडीएम

ग्रामीणों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया। एसडीएम प्रवीण भगत आंदोलन स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से सीधे बातचीत की। काफी देर तक चली चर्चा में ग्रामीणों ने सड़क की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़ी परेशानियों को विस्तार से प्रशासन के सामने रखा।

ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। स्कूली बच्चों के लिए समस्या और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार उन्हें इंतजार ही मिला। इसी कारण इस बार ग्रामीणों ने धरने का रास्ता अपनाया।

इस बार मिला सिर्फ आश्वासन नहीं, लिखित वादा

ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इस बार केवल मौखिक आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त नहीं कराया गया। एसडीएम प्रवीण भगत की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 1 अक्टूबर 2026 से नवापारा से सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।

लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि उनका भरोसा अब केवल कागज पर नहीं, बल्कि सड़क पर शुरू होने वाले वास्तविक निर्माण कार्य से कायम होगा।

ग्रामीणों के लिए 1 अक्टूबर अब महज एक तारीख नहीं है, बल्कि 15 वर्षों से चले आ रहे इंतजार की परीक्षा की तारीख बन गई है।

गड्ढों में नहाने से शुरू हुआ विरोध, बच्चों ने भी उठाई आवाज

राबर्टसन-भालूनारा सड़क को लेकर आंदोलन अचानक नहीं खड़ा हुआ। लंबे समय से सड़क की बदहाली ग्रामीणों के बीच नाराजगी का कारण बनी हुई थी। जब लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो युवाओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया।

सड़क पर बने गड्ढों में नहाकर युवाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद नवापारा हाईस्कूल के बच्चों ने भी सड़क पर उतरकर विरोध किया। बच्चों के प्रदर्शन ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

स्कूली बच्चों का सड़क की बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतरना इस बात का संकेत था कि समस्या केवल आवागमन की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की रोजमर्रा की सुरक्षा और शिक्षा से भी जुड़ी हुई है।

विधायक उमेश पटेल के पहुंचने से आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन

आंदोलन के बीच खरसिया विधायक उमेश पटेल ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की बात सुनी और सड़क निर्माण की मांग को मजबूती से सामने रखा। विधायक की मौजूदगी ने आंदोलनकारियों को राजनीतिक समर्थन दिया और प्रशासन पर भी बातचीत के लिए दबाव बढ़ा।

वहीं इस पूरे आंदोलन में जिला कांग्रेस के प्रवक्ता तारेंद्र डनसेना भी समर्थकों के साथ ग्रामीणों के बीच सक्रिय नजर आए। उन्होंने ग्रामीणों की मांग और सड़क की स्थिति को लेकर आंदोलन को समर्थन दिया।

इसके अलावा आंदोलन से दो दिन पहले भाजपा नेता रवि भगत भी मौके पर पहुंच चुके थे और ग्रामीणों से चर्चा कर सड़क की स्थिति तथा उनकी मांगों को समझा था। इस तरह सड़क का मुद्दा राजनीतिक दलों और प्रशासन दोनों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

ग्रामीणों ने कहा—15 साल इंतजार किया, अब काम चाहिए

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण के लिए वर्षों तक इंतजार किया है। शिकायतें की गईं, मांगें रखी गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। इस बार लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया है।

ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने निर्माण शुरू करने की निश्चित तारीख बताई है। इसलिए अब ग्रामीणों की नजरें उसी तारीख पर टिकी हैं।

उनका कहना है कि अब आश्वासन से ज्यादा जरूरी सड़क पर निर्माण कार्य का दिखाई देना है। मशीनें पहुंचें, निर्माण सामग्री आए और काम शुरू हो—तभी उनका भरोसा पूरी तरह बहाल होगा।

आंदोलन समाप्त नहीं, फिलहाल स्थगित

धरना समाप्त होने के बावजूद ग्रामीणों ने अपनी मांग को खत्म नहीं माना है। बातचीत के दौरान यह आश्वासन भी दिया गया कि यदि तय समय पर सड़क निर्माण शुरू नहीं होता और ग्रामीण दोबारा आंदोलन करते हैं, तो पुलिस उन्हें रोकने की कार्रवाई नहीं करेगी।

इससे साफ है कि ग्रामीणों ने फिलहाल प्रशासन के लिखित भरोसे पर आंदोलन स्थगित किया है, लेकिन अपनी मांग से पीछे नहीं हटे हैं।

अब 1 अक्टूबर पर टिकी सबकी निगाहें

राबर्टसन-भालूनारा सड़क की कहानी अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एक तरफ 15 वर्षों से सड़क की बदहाली झेल रहे ग्रामीण हैं, जिन्होंने गड्ढों में नहाने से लेकर धरने तक का रास्ता अपनाया। दूसरी तरफ प्रशासन है, जिसने अब लिखित रूप से 1 अक्टूबर 2026 से सड़क निर्माण शुरू करने का भरोसा दिया है।

अब असली परीक्षा 1 अक्टूबर को होगी। यदि निर्धारित तारीख पर सड़क निर्माण का काम शुरू होता है तो यह ग्रामीणों के लंबे संघर्ष और आंदोलन की बड़ी सफलता होगी। लेकिन यदि तारीख निकल जाती है और सड़क पर काम शुरू नहीं होता, तो ग्रामीणों के पास दोबारा आंदोलन की राह पर लौटने का विकल्प खुला है।

फिलहाल धरना समाप्त है, लेकिन ग्रामीणों की निगाहें सड़क पर हैं—क्योंकि 15 साल के इंतजार के बाद अब उन्हें आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।

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