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ध्रुव चरित्र ने दिया दृढ़ संकल्प और भक्ति का संदेश, श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गूंजा भक्ति का स्वर

रायपुर। दुबे कॉलोनी, मोवा रायपुर स्थित शर्मा परिवार के निवास स्थल पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की भक्ति, ध्रुव चरित्र और जीवन में दृढ़ संकल्प की महत्ता का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य पंडित कान्हा शास्त्री जी ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

आचार्य कान्हा शास्त्री जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव की कथा केवल एक बालक की तपस्या की कथा नहीं है, बल्कि यह आज के परिवेश में भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प दृढ़ हो तो व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति को पार कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चे और युवा तुलना, प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में ध्रुव चरित्र उन्हें एकाग्रता, धैर्य, गुरु के मार्गदर्शन और सकारात्मक दिशा का संदेश देता है।

कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि ध्रुव को प्रारंभ में सम्मान और अधिकार की इच्छा थी, लेकिन भगवान श्रीहरि के दर्शन के बाद उनकी चेतना का विस्तार हुआ। उन्होंने समझाया कि भगवान की प्राप्ति के बाद सांसारिक उपलब्धियां स्वयं छोटी प्रतीत होने लगती हैं।

आचार्य कान्हा शास्त्री जी ने कहा-

ध्रुव हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियां हमारे भविष्य का निर्धारण नहीं करतीं, हमारा संकल्प करता है। अपमान और कठिनाई को जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व के निर्माण का अवसर बनाना चाहिए।”

उन्होंने माता-पिता से बच्चों में संस्कार, धैर्य और आध्यात्मिक चेतना विकसित करने का आह्वान किया। कथा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ के जप से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena