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सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्रोत हैं स्वामी श्रद्धानंद  : राज्यपाल रमेन डेका

आर्ष गुरुकुल तुरंगा में बलिदान शताब्दी महोत्सव संपन्न

रायगढ़, 21 फरवरी 2026।

पुसौर विकासखंड के ग्राम तुरंगा स्थित आर्ष गुरुकुल आश्रम में स्वामी श्रद्धानंद के पावन बलिदान के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘स्वामी श्रद्धानंद बलिदान महामहोत्सव एवं राष्ट्र रक्षा महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान तथा छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना ‘अरपा पैरी के धार’ के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका जी ने यज्ञ कुंड का दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

स्वामी जी का जीवन समर्पण और सामाजिक जागरण का प्रतीक

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी श्रद्धानंद एक महान समाज सुधारक, प्रखर शिक्षाविद् और वीर स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी, स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित होकर आर्य समाज के प्रमुख स्तंभ बने और वैदिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वर्ष 1902 में स्थापित गुरुकुल कांगड़ी के माध्यम से उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और आधुनिक विषयों का समन्वय प्रस्तुत किया, जो आज भी प्रासंगिक है।

सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने छुआछूत, जातिवाद और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। वे ‘शुद्धि आंदोलन’ के प्रणेता थे, जिसका उद्देश्य उन लोगों को उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान से पुनः जोड़ना था, जो विभिन्न कारणों से उससे दूर हो गए थे।

उन्होंने वर्तमान शिक्षा पद्धति में नैतिक एवं चारित्रिक मूल्यों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि जीवन का लक्ष्य केवल करियर निर्माण न होकर समाज सेवा और आत्मसंतोष भी होना चाहिए। साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया।

भूमि पूजन और सम्मान समारोह

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने संस्थान के ‘अन्नपूर्णा भवन’ निर्माण हेतु भूमि पूजन किया। श्रीमती मल्लिका चतुर्भुज को संस्थान के विकास के लिए 10 एकड़ भूमि दान करने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने राज्यपाल के आगमन को क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया और कहा कि स्वामी जी की शहादत राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश देती है। श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने धर्मांतरण के प्रयासों के विरोध में स्वामी जी के योगदान को रेखांकित किया।

श्री कपिलदेव शास्त्री ने उत्तराखंड में संचालित शुद्धि आंदोलन के ऐतिहासिक प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि आज भी इस संस्थान में पूर्वोत्तर भारत के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथियों को शाल, श्रीफल एवं स्वामी जी का छायाचित्र भेंटकर सम्मानित किया गया। संचालन आचार्य राकेश कुमार ने किया तथा डॉ. राम कुमार पटेल ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर आर्ष गुरुकुल आश्रम के सदस्यगण, स्वामी जी के अनुयायी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Tarendra Dansena

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