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मुंबई के डॉक्टरों का कमाल: 10 साल से दृष्टिहीन गायनेकोलॉजिस्ट की लौटी रोशनी, दुनिया में पहली बार ऐसी सर्जरी

नई दिल्ली। चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। मुंबई के डॉक्टरों ने 10 वर्षों से दृष्टिहीन 44 वर्षीय स्त्री रोग विशेषज्ञ की आंखों की रोशनी एक जटिल और अनोखी सर्जरी के जरिए वापस लौटा दी। इसे दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है, जहां कई उन्नत तकनीकों का एक साथ सफल प्रयोग किया गया।

10 साल से थीं पूरी तरह अंधी

मरीज गंभीर ग्लूकोमा और अन्य जटिल नेत्र रोगों से जूझ रही थीं। उनकी दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी थी, जबकि बाईं आंख में केवल ‘Perception of Light’ यानी हल्की रोशनी का आभास ही बचा था। पूर्व में कई सर्जरी कराई जा चुकी थीं, लेकिन कोई स्थायी सुधार नहीं हो सका था, जिससे उन्होंने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी।

खिसका हुआ लेंस बना था बड़ी समस्या

डॉक्टरों के अनुसार, बाईं आंख में लगा पुराना कृत्रिम लेंस (IOL) अपनी जगह से खिसक गया था और कॉर्निया व आइरिस को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा था। स्थिति बेहद जटिल थी और सर्जरी में उच्च जोखिम शामिल था।

5F-ISHF’ तकनीक से रचा इतिहास

इस चुनौती को डॉ अग्रवाल आई हॉस्पिटल की सर्जिकल टीम ने स्वीकार किया। प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ के नेतृत्व में टीम ने ‘5F-ISHF’ तकनीक सहित कई उन्नत प्रक्रियाओं को एक साथ अंजाम दिया।

गलत स्थिति में लगे लेंस को हटाकर नई तकनीक से नया लेंस प्रत्यारोपित किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में पहली बार इस तरह की संयुक्त उन्नत तकनीकों का सफल प्रयोग हुआ है।

फिर शुरू की मेडिकल प्रैक्टिस

सर्जरी के तुरंत बाद मरीज की बाईं आंख की दृष्टि 6/24 तक बहाल हो गई। यह उनके लिए जीवन बदल देने वाला क्षण रहा। अब वह अपनी मेडिकल प्रैक्टिस में लौट चुकी हैं और मरीजों की सेवा कर रही हैं। डॉक्टरों को उम्मीद है कि समय के साथ उनकी दृष्टि में और सुधार होगा।

यह उपलब्धि न केवल भारत के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि ग्लूकोमा और जटिल नेत्र रोगों से पीड़ित दुनिया भर के मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण भी साबित हो रही है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri