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बोर्ड परीक्षा का समय: अंकों से अधिक महत्वपूर्ण है मन की स्थिरता

-पंडित कान्हा शास्त्री

फरवरी-मार्च का समय केवल मौसम परिवर्तन का नहीं, लाखों विद्यार्थियों के जीवन में तनाव की लहर का भी समय है। बोर्ड परीक्षाएँ जैसे-जैसे निकट आती हैं, बच्चों के मन में भय, अपेक्षा, तुलना और असफलता की आशंका बढ़ने लगती है। कई बार यह दबाव इतना गहरा हो जाता है कि बच्चा पढ़ाई से अधिक “परिणाम” के बारे में सोचने लगता है।

सबसे पहले यह समझना आवश्यक है परीक्षा जीवन का एक पड़ाव है, जीवन स्वयं नहीं। अंक महत्वपूर्ण हैं, पर वे व्यक्ति की पूर्ण क्षमता का अंतिम मापदंड नहीं।

आज की पीढ़ी केवल पाठ्यपुस्तकों का दबाव नहीं झेल रही; वह सोशल मीडिया तुलना, पारिवारिक अपेक्षाएँ और भविष्य की अनिश्चितता भी साथ लेकर चल रही है। ऐसे समय में बच्चों को डाँट नहीं, दिशा चाहिए; आलोचना नहीं, आश्वासन चाहिए।

🔹 बच्चों के लिए संदेश

प्रतिदिन 45–50 मिनट पढ़ाई के बाद 10 मिनट विश्राम लें। मोबाइल उपयोग सीमित रखें; तुलना से दूर रहें। “मैं असफल हो जाऊँगा” जैसे विचार आते ही 5 गहरी साँसें लें। नींद कम न करें 6–8 घंटे की नींद स्मरण शक्ति के लिए आवश्यक है। अंतिम दिनों में नया पाठ न उठाएँ; जो पढ़ा है, उसी का पुनरावृत्ति करें। याद रखें मन शांत होगा तो स्मरण शक्ति स्वतः प्रबल होगी।

🔹 अभिभावकों के लिए संदेश

बच्चों की तुलना किसी और से न करें। घर का वातावरण शांत रखें। परिणाम की नहीं, प्रयास की प्रशंसा करें। परीक्षा के बाद के विकल्पों पर सकारात्मक चर्चा करें। कई बार माता-पिता का एक वाक्य बच्चे के आत्मविश्वास को बना या बिगाड़ सकता है।

🔹 आध्यात्मिक संतुलन

सुबह 5 मिनट आँख बंद कर “ॐ” का उच्चारण या गहरी श्वास का अभ्यास मन को स्थिर करता है। यदि संभव हो तो पढ़ाई प्रारंभ करने से पहले सरस्वती वंदना करें यह मन में श्रद्धा और आत्मबल दोनों बढ़ाती है।

बोर्ड परीक्षा एक अवसर है अपनी तैयारी और अनुशासन को परखने का। यह अंतिम सत्य नहीं है। जीवन में आगे अनेकों अवसर मिलेंगे। अंक आपके व्यक्तित्व का केवल एक भाग हैं, सम्पूर्ण नहीं। बच्चों को यह विश्वास दिलाना आज के समय में बहुत जरूरी है कि-तुम एग्जाम और परिणाम से पहले भी महत्वपूर्ण हो, और परिणाम के बाद भी।”

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Tarendra Dansena

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