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श्रम कानून तोड़ने पर बड़ा दंड: रायगढ़ की फैक्ट्रियों पर लाखों की पेनाल्टी

लेबर कोर्ट ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों पर ₹9.70 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया

रायगढ़। रायगढ़ जिले में कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) ने अलग-अलग प्रकरणों में औद्योगिक इकाइयों के अधिभोगियों एवं कारखाना प्रबंधकों पर लाखों रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है। यह कार्रवाई औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण और न्यायालयीन सुनवाई के बाद की गई।

किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई

Jindal steel, and power, यूनिट-4 (MLSM), खरसिया रोड, रायगढ़ के अधिभोगी सब्यसाची बंद्योपाध्याय को कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7A(2)(d) के उल्लंघन का दोषी पाते हुए लेबर कोर्ट ने ₹70,000 का जुर्माना लगाया।

MSP and power Limited, के अधिभोगी प्रदीप कुमार डे तथा कारखाना प्रबंधक संजय सिंह परिहार को धारा 7A(2)(a) और धारा 21(1)(4) के उल्लंघन पर ₹3,20,000 का जुर्माना लगाया गया।

इसी कंपनी से जुड़े एक अन्य प्रकरण में प्रदीप कुमार डे एवं संजय सिंह परिहार को धारा 41 तथा नियम 73(घ), 73(1) के उल्लंघन का दोषी मानते हुए श्रम न्यायालय ने ₹2,80,000 का दंड अधिरोपित किया।

एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड के एक अलग मामले में अधिभोगी प्रदीप कुमार डे को धारा 7A(2)(d) एवं 7A(2)(a) के उल्लंघन पर ₹1,60,000 का जुर्माना लगाया गया।

वहीं, RS lspat(Raigarh) Private Limited के अधिभोगी एवं कारखाना प्रबंधक विवेकचंद्र उपाध्याय को धारा 7A(2)(a) तथा 21(1)(4) के उल्लंघन पर ₹1,40,000 का दंड दिया गया।

इन सभी मामलों में अलग-अलग प्रकरणों को मिलाकर कुल जुर्माना राशि लगभग ₹9 लाख 70 हजार से अधिक बैठती है।

क्या है उल्लंघन का आधार?

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कारखानों में श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों, मशीनों पर सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, जोखिम नियंत्रण उपायों तथा वैधानिक रजिस्टरों के संधारण में कमियां पाई गई थीं। कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7A के तहत अधिभोगी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करे। संबंधित धाराओं के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

प्रशासन का सख्त संदेश-

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी औद्योगिक इकाई को सुरक्षा मानकों की अनदेखी की अनुमति नहीं दी जाएगी। निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने उद्योग प्रबंधन से अपील की है कि वे कारखाना अधिनियम, 1948 के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षित और जिम्मेदार कार्य वातावरण बनाया जा सके।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri