Skip to content

रायगढ़ में जहर घुल रही हवा: प्रदूषण से 10-15 साल की उम्र कुर्बान, जनप्रतिनिधि मौन

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वायु प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि स्थानीय निवासी विकास के नाम पर अपनी 10-15 साल की जिंदगी की आहुति दे रहे हैं। PM10 और PM2.5 कणों का स्तर निर्धारित मानकों से दोगुना से अधिक पहुंच गया है, जिससे सांस, हृदय रोग, कैंसर और त्वचा विकार फैल रहे हैं।

मिलूपारा, छाल, पूंजीपथरा और कुंजेमुरा जैसे इलाकों में स्थिति सबसे भयावह है।राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, PM10 का वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम/घन मीटर, PM2.5 का 40, NO2 का 40 और O3 का 40 होना चाहिए। लेकिन रायगढ़ में PM10 120 तक और कुछ क्षेत्रों में 200-78 माइक्रोग्राम/घन मीटर दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 का स्तर 50 होने पर बच्चे घर से बाहर न निकलें, और 65 पर बुजुर्गों को भी अंदर रहना चाहिए। फिर भी, आजीविका की मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।

उद्योगों और वाहनों से निकलने वाले धुआं, धूल और रसायनिक गैसें फेफड़ों तक पहुंच रही हैं, जो अम्लीय वर्षा का रूप ले रही हैं। स्थानीय निवासी पूछते हैं—क्या खनिज समृद्ध इस धरती का कसूर है? जनप्रतिनिधि और प्रशासन चुप्पी साधे हैं, जबकि जागरूक नागरिक इसे राजनीतिक मुद्दा बताकर नजरअंदाज कर रहे हैं। विपक्ष सक्रिय है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों पर सख्ती, जैसे ताले लगाना या प्रबंधन को सजा, ही समाधान है। एक हत्या पर 302 की कार्रवाई होती है, लेकिन सामूहिक नरसंहार पर मौन?निवासी आह्वान कर रहे हैं—पहले प्रशासन से बात, फिर उद्योगपतियों से अपील, और अंत में न्यायपालिका का दरवाजा। वर्तमान नेतृत्व से भी उम्मीदें बंधी हैं। रायगढ़वासी जागें, वरना भविष्य खतरे में है।

ख़बर शेयर करें:

Description of the image
Tarendra Dansena

Tarendra Dansena