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6 नवंबर को धनतेरस, 8 को नरक चतुर्दशी और दीपावली; प्रदोषकाल में होगा महालक्ष्मी पूजन

दीपावली पर प्रदोषकाल में माता महालक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व, स्थिर वृषभ लग्न में पूजा करना गृहस्थों के लिए माना गया है शुभ।

रायपुर। दीपोत्सव का महापर्व इस वर्ष विशेष धार्मिक एवं ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। धनतेरस से शुरू होने वाला पांच दिवसीय दीपोत्सव धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। ज्योतिषाचार्य पंडित कान्हा शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस तथा 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। दीपावली पर प्रदोषकाल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व रहेगा।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और कुबेर की आराधना

पंडित कान्हा शास्त्री ने बताया कि शुक्रवार, 6 नवंबर को कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के अवसर पर धनतेरस मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन किया जाता है। समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की मान्यता के कारण यह पर्व आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन स्वर्ण, रजत एवं धातु की वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा है। संध्याकाल में यमदीप दान का भी विशेष महत्व है।

रूप चौदस पर अभ्यंग स्नान का विधान

उन्होंने बताया कि 8 नवंबर को प्रातःकाल नरक चतुर्दशी अर्थात रूप चौदस का पर्व रहेगा। इस दिन सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध कर देवताओं और बंदियों को मुक्ति दिलाई थी। रूप चौदस पर शरीर में तैलाभ्यंग, उबटन और स्नान को आरोग्य, सौंदर्य एवं शारीरिक शुद्धता से जोड़कर देखा जाता है।

दीपावली पर 5:49 से 7:48 बजे तक लक्ष्मी पूजन

ज्योतिषाचार्य पंडित कान्हा शास्त्री ने बताया कि रविवार, 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। रायपुर के स्थानीय समयानुसार महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त सायं 5:49 बजे से 7:48 बजे तक रहेगा। यह समय प्रदोषकाल में स्थिर वृषभ लग्न की उपलब्धता के कारण विशेष महत्व रखता है।

इस दिन प्रदोषकाल सायं 5:24 से 7:57 बजे तक रहेगा। वृषभ स्थिर लग्न सायं 5:49 से 7:48 बजे तक उपलब्ध रहेगा। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को प्रातः 11:27 बजे प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।

उन्होंने बताया कि दीपावली पर माता महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश एवं माता सरस्वती का पूजन करना चाहिए। स्वच्छता, दीपदान, मंत्र जप और श्रद्धापूर्वक आराधना इस पर्व के प्रमुख अंग हैं।

अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश

पंडित कान्हा शास्त्री ने कहा कि दीपावली केवल धन और वैभव का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, ज्ञान और सद्भावना का प्रकाश फैलाने का महापर्व है। दीपक की लौ हमें अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena