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25 दिनों से आंदोलन: NTPC के खिलाफ आठ गांव के ग्रामीण पहुंचे जिला मुख्यालय, 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

रायगढ़, छत्तीसगढ़।

NTPC की तिलाईपाली परियोजना से प्रभावित आठ ग्रामों के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि वे 25 जनवरी से शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो वे एनटीपीसी कोयला खनन एवं संबंधित परियोजनाओं के कार्यों का व्यापक विरोध करेंगे।

इन गांवों के ग्रामीण शामिल

तिलाईपाली, कुधुरमौहा, नयारामपुर, चोटीगुड़ा, साल्हेपाली, अजीतगढ़ और रायकेरा सहित कुल आठ गांवों के प्रभावित परिवारों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और उन्हें पर्याप्त जानकारी व सहमति के बिना अधिग्रहण कर लिया गया।

अपर कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि सभी बिंदुओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई हेतु टीम गठित की जाएगी।

क्या हैं 10 सूत्रीय प्रमुख मांगें?

1. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में अधिग्रहण निरस्त करने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि उनका क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। आरोप है कि 27 नवंबर 2009 की अधिसूचना के तहत बिना सूचना भूमि अधिग्रहण किया गया, जिसे निरस्त कर 8 सितंबर 2015 से नया अधिग्रहण मानते हुए मुआवजा दिया जाए।

2. महाग्रामसभा के प्रस्तावों पर कार्रवाई

10 फरवरी को आयोजित महाग्रामसभा में पारित प्रस्तावों पर संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर अधिग्रहण रद्द करने की मांग की गई है।

3. मुआवजा निर्धारण में नए कानून का पालन

कोल बियरिंग एरिया (अधिग्रहण) अधिनियम 1957 की धारा 13(5) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार मुआवजा देने की मांग की है।

4. पेशा कानून का पालन

पेसा कानून के तहत आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और खनिजों पर अधिकार सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

5. बिना मकान मुआवजा पर आपत्ति

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई गांवों में बिना मकान का मुआवजा दिया गया है। या तो उचित कार्रवाई की जाए या अन्य प्रभावितों को भी समान मुआवजा मिले।

6. तेंदूपत्ता कार्डधारियों को मुआवजा

प्रति कार्डधारी 5 लाख रुपये मुआवजा देने के आश्वासन का पालन करने की मांग की गई है।

7. कथित रूप से गलत तरीके से सहमति पत्र

ग्रामीणों का आरोप है कि परामर्श सहमति के नाम पर रजिस्टर में हस्ताक्षर कराकर उन्हें अन्य दस्तावेजों में संलग्न किया गया।

8. पुनर्वास योजना में कटऑफ डेट संशोधन

8 अगस्त 2015 को नया आवंटन मानकर पुनर्वास योजना में संशोधन की मांग।

9. वन अधिकार पट्टा के समान मान्यता

पूर्वजों से काबिज भूमि पर कृषि कर रहे किसानों को, यदि उनके पास लगान रसीद व अन्य दस्तावेज हैं, तो वन अधिकार पट्टा के समान मुआवजा देने की मांग।

10. रोजगार एवं आर्थिक सहायता

प्रभावित परिवारों को एनटीपीसी एवं संबंधित ठेका कंपनियों में रोजगार देने तथा बाहरी व्यक्तियों को हटाने की मांग की गई है। यदि रोजगार संभव न हो, तो 2025 में 18 वर्ष पूर्ण कर चुके प्रत्येक परिवारजन को कम से कम 15 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन उनके अधिकारों, सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए है। अब प्रशासनिक स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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Tarendra Dansena

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