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रूस-अमेरिका डील से हिला गोल्ड मार्केट ?

1.76 लाख के ऑल टाइम हाई से फिसला सोना, क्या 1 लाख से नीचे जाएगा भाव ?

नई दिल्ली | ब्रेकिंग डेस्क

अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूस और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों ने गोल्ड मार्केट में हलचल मचा दी है। हाल ही में 1,76,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई को छूने वाला सोना अब दबाव में है। निवेशकों के बीच यह सवाल गूंज रहा है क्या कीमतें 1 लाख रुपये से नीचे तक जा सकती हैं?

विश्लेषकों का कहना है कि अगर रूस फिर से डॉलर आधारित व्यापार प्रणाली में लौटता है, तो वैश्विक स्तर पर डी-डॉलराइजेशन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इससे सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद कम हो सकती है और डॉलर मजबूत होने से गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है।

🔴 रूस-अमेरिका संभावित डील: 7 बड़े पॉइंट

सूत्रों के मुताबिक संभावित समझौते में ये अहम बिंदु शामिल हो सकते हैं:

1️⃣ एविएशन सहयोग – रूसी विमानों के आधुनिकीकरण में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी।

2️⃣ एनर्जी पार्टनरशिप – तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन में संयुक्त निवेश।

3️⃣ अमेरिकी कंपनियों की वापसी – रूस में बाजार दोबारा खोलने की पहल।

4️⃣ न्यूक्लियर और AI सहयोग – परमाणु ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट्स में साझेदारी।

5️⃣ डॉलर में व्यापार – तेल-गैस सहित प्रमुख सौदों में डॉलर सेटलमेंट सिस्टम में वापसी।

6️⃣ मिनरल डील – लिथियम, तांबा, निकल जैसी अहम धातुओं में सहयोग।

7️⃣ फॉसिल फ्यूल रणनीति – वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पादन बढ़ाने की संयुक्त योजना।

📉 गोल्ड पर संभावित असर

अगर रूस डॉलर में व्यापार शुरू करता है, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है। सेंट्रल बैंक अपनी गोल्ड खरीद कम कर सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट का दबाव बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी भी सोने को सपोर्ट दे सकते हैं।

📊 आगे क्या?

फिलहाल गोल्ड मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है। रूस-अमेरिका संबंधों की दिशा, डॉलर की मजबूती और सेंट्रल बैंकों की रणनीति ही तय करेगी कि सोना स्थिर होगा या फिर 1 लाख रुपये के स्तर की ओर फिसलेगा।

निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri