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निक्षय निरामय अभियान 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

टीबी उन्मूलन लक्ष्य को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

हाई रिस्क ग्रुप की पहचान, माइक्रो प्लान एवं उपचार व्यवस्था पर विशेष जोर

रायगढ़, 16 फरवरी 2026।

जिले में क्षय रोग उन्मूलन के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने के उद्देश्य से निक्षय निरामय अभियान 2.0 के प्रभावी संचालन हेतु आज रायगढ़ में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। यह प्रशिक्षण कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें खंड चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी एवं पर्यवेक्षक शामिल हुए।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अभियान की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाना, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लान) तैयार करना तथा हाई रिस्क ग्रुप की समय रहते पहचान कर जांच और उपचार सुनिश्चित करना रहा। प्रशिक्षण में मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग, सैंपल कलेक्शन, लैब जांच एवं उपचार प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।

टीबी के प्रकार और लक्षणों पर विस्तृत जानकारी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि टीबी मुख्यतः दो प्रकार की होती है—फेफड़ों की टीबी और फेफड़ों के बाहर की टीबी। फेफड़ों की टीबी हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है, जबकि अन्य प्रकार की टीबी रीढ़, मस्तिष्क, पेट, गुर्दे अथवा लसीका ग्रंथियों को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी सुप्त (Latent) और सक्रिय (Active) दोनों अवस्थाओं में पाई जाती है। सक्रिय टीबी में लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन में कमी, सीने में दर्द और रात में पसीना आना प्रमुख लक्षण हैं।

संक्रमण से बचाव और उपचार पर जोर

नोडल क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. जया कुमारी चौधारी ने बताया कि टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। इससे बचाव के लिए बीसीजी टीकाकरण, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, घरों में पर्याप्त वेंटिलेशन तथा संतुलित और पौष्टिक आहार आवश्यक है।

सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल ने कहा कि टीबी उन्मूलन में मैदानी स्वास्थ्य अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि मरीज निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करता है, तो टीबी पूर्णतः ठीक हो सकती है। उन्होंने उपचार के दौरान दवा न छोड़ने और नियमित फॉलोअप जांच की अनिवार्यता पर बल दिया।

नवीन शोध और अद्यतन जानकारी से होगा सशक्त क्रियान्वयन

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा ने बताया कि समय-समय पर उपचार पद्धति में बदलाव और नए शोध के आधार पर दिशा-निर्देश अपडेट किए जाते हैं। इन्हीं अद्यतन जानकारियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसे प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं।

प्रशिक्षण सत्र में अभियान की मॉनिटरिंग प्रणाली, पोषण सहायता योजना तथा रिपोर्टिंग व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अंत में सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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Tarendra Dansena

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