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कुसुम योग : जीवन को सुगंधित करने वाला राजयोग

✍️ पं. कान्हा शास्त्री (Astrology and Vastu Consultant)

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में अनेक ऐसे योगों का वर्णन मिलता है जो जातक के जीवन को असाधारण बना देते हैं। उन्हीं शुभ और प्रभावशाली योगों में से एक है कुसुम योग। यह योग कुंडली में बनने पर जातक को वैभव, सम्मान, प्रतिष्ठा और नेतृत्व प्रदान करने वाला माना गया है।

प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ जातक पारिजात में कुसुम योग के प्रभाव का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार जिस जातक की कुंडली में कुसुम योग का निर्माण होता है, वह व्यक्ति उच्च कुल में जन्म लेने वाला, विद्वान, प्रभावशाली और ऐश्वर्ययुक्त जीवन जीने वाला होता है।

कुसुम योग का निर्माण

ज्योतिष शास्त्र में कुसुम योग के निर्माण के लिए निम्न श्लोक मिलता है –

“स्थिर लग्ने भृगौ केन्द्रे त्रिकोणेन्दो शुभेतरे।

मानस्थान गते सौरे योगोऽयं कुसुमो भवेत्॥”

अर्थात यदि जन्म कुंडली में –

लग्न स्थिर राशि (वृष, सिंह, वृश्चिक या कुम्भ) का हो, शुक्र केंद्र (1, 4, 7 या 10) में स्थित हो, चन्द्रमा त्रिकोण (5 या 9) में स्थित होकर शुभ ग्रहों से युक्त हो, तथा शनि दशम भाव में स्थित हो,

तो इस स्थिति में कुसुम योग का निर्माण होता है।

कुछ ज्योतिषाचार्यों का मत है कि यदि लग्न चर राशि (मेष, कर्क, तुला या मकर) का भी हो और उपरोक्त ग्रह स्थितियां उपस्थित हों, तब भी कुसुम योग का निर्माण संभव है।

परंतु प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सीताराम झा ने कुसुम योग के लिए स्थिर लग्न को अधिक महत्वपूर्ण माना है।

कुसुम योग के अन्य मत

ज्योतिष के कुछ अन्य मतों के अनुसार यदि –

लग्न में गुरु स्थित हों दशम भाव में शनि स्थित हों द्वितीय भाव में सूर्य स्थित हों तथा पंचम या नवम भाव में चन्द्रमा स्थित हों

तो भी कुसुम योग का निर्माण माना जाता है।

एक अन्य श्लोक के अनुसार

“लग्नात् सप्तमगे चन्द्रे चन्द्रादष्टमगे रवौ।

गुरुणा स्थीयते लग्ने कुसुमो योग ईरितः॥”

अर्थात यदि लग्न से सप्तम में चन्द्रमा हो, चन्द्रमा से अष्टम अर्थात जन्म लग्न से द्वितीय भाव में सूर्य स्थित हो तथा लग्न में गुरु स्थित हों, तब भी कुसुम योग बनता है।

कुसुम योग का प्रभाव

कुसुम योग के प्रभाव का वर्णन इस प्रकार किया गया है-

“दाता महीमण्डलनाथबन्द्यो,

भोगी महावंशज राजमुख्यः।

लोके महाकीर्तियुक्तः प्रतापी,

नाथो नराणां कुसुमोद्भवः स्यात्॥”

अर्थात कुसुम योग से युक्त जातक-

दानशील और उदार स्वभाव का होता है उच्च कुल में जन्म लेता है समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है यश, कीर्ति और प्रभाव से युक्त होता है राजा के समान सुख-सुविधाओं का उपभोग करता है समाज या परिवार का नेतृत्व करने वाला बन सकता है वर्तमान समय में ऐसे योग से युक्त व्यक्ति प्रशासन, राजनीति या उच्च पदों तक पहुंच सकता है।कुसुम योग वास्तव में कुंडली को मजबूती देने वाला एक प्रभावशाली और स्थिर योग माना गया है। यह योग व्यक्ति के जीवन में प्रतिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और ऐश्वर्य प्रदान करता है।जैसे पुष्प अपनी सुगंध से वातावरण को सुगंधित कर देता है, उसी प्रकार कुसुम योग से युक्त व्यक्ति अपने गुण, विद्वता और प्रभाव से समाज में अपनी ख्याति की सुगंध फैलाता है।

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Kanha Shastri

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