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Holi 2026: छत्तीसगढ़ के इन गांवों में अनोखी परंपरा, 100 साल से नहीं हुआ होलिका दहन; जानें वजह

कोरबा जिले के धमनागुड़ी और खरहरी में नहीं जलती होलिका, रंग-गुलाल पर भी परंपरागत रोक

कोरबा। जहां देशभर में होली का पर्व रंग, उमंग और होलिका दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ के धमनागुड़ी और खरहरी गांवों में पिछले लगभग 100 वर्षों से न तो होलिका दहन होता है और न ही रंग-गुलाल खेला जाता है। यह अनूठी परंपरा हर साल चर्चा का विषय बनती है।

ग्रामीणों के अनुसार, पूर्वजों की विशेष मान्यता और आस्था के कारण यहां होली पारंपरिक तरीके से नहीं मनाई जाती। गांव में लोग शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पर्व का दिन बिताते हैं, लेकिन अग्नि प्रज्वलन यानी होलिका दहन की परंपरा का पालन नहीं किया जाता।

देवस्थल में पूजा, लेकिन नहीं खेलते रंग

धमनागुड़ी निवासी गनपत सिंह कंवर बताते हैं कि करीब एक सदी से गांव में होली नहीं मनाई गई है। वहीं खरहरी और उसके आश्रित गांवों में बुजुर्ग और बैगा समाज के लोग देवस्थल में विशेष पूजा करते हैं। वे प्रतीकात्मक रूप से रंग-गुलाल अर्पित करते हैं और टीका लगाते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से रंग खेलने की परंपरा नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि आज तक होली को लेकर गांव में किसी प्रकार का विवाद या मारपीट की स्थिति नहीं बनी है। वे इसे गांव की शांति और एकता से जोड़कर देखते हैं।

अनहोनी की आशंका ने परंपरा को किया मजबूत

खरहरी निवासी तामेश्वर सिंह पैकरा के अनुसार, लगभग नौ वर्ष पूर्व एक परिवार ने गांव में होली मनाने की कोशिश की थी। रंग-गुलाल खेलने के कुछ समय बाद उनके घर में आग लग गई। इस घटना के बाद से गांव में होली खेलने को लेकर और अधिक सख्ती बरती जाने लगी। ग्रामीणों का मानना है कि होली खेलने से अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

गांव में प्रवेश से पहले रंग धोना अनिवार्य

गांव की परंपरा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बाहर किसी अन्य स्थान पर होली खेलकर आता है, तो उसे गांव में प्रवेश करने से पहले रंग-गुलाल पूरी तरह धोना पड़ता है। इसके बाद ही उसे गांव में प्रवेश की अनुमति मिलती है। यह नियम आज भी सख्ती से लागू है।

गांव वालों का कहना है कि यह परंपरा उनकी आस्था और सामाजिक अनुशासन का हिस्सा है। शांतिपूर्ण वातावरण और आपसी सामंजस्य बनाए रखने के लिए वे इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं।

रंगों के इस पर्व के बीच छत्तीसगढ़ के ये गांव अपनी अलग पहचान और मान्यता के कारण विशेष ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri