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NTPC Limited-लारा के खिलाफ 24 फरवरी को विशाल धरना

लारा संघर्ष समिति ने किया आंदोलन का ऐलान

रायगढ़। पुसौर विकासखंड में स्थापित एनटीपीसी के खिलाफ भू-विस्थापितों और प्रभावित परिवारों ने 24 फरवरी 2026 को सांकेतिक धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह धरना छपोरा स्थित परियोजना के मुख्य द्वार के सामने पुराने धरना स्थल पर आयोजित किया जाएगा।

15 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा

लारा संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों का आरोप है कि वर्ष 2011 में जिला प्रशासन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत बड़ी मात्रा में स्थानीय किसानों की भूमि अधिग्रहित कर एनटीपीसी लारा परियोजना को सौंप दी गई थी।

हालांकि, अधिग्रहण के लगभग 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी विस्थापित परिवारों को न तो योग्यतानुसार नियमित रोजगार मिला और न ही पुनर्वास नीति का पूर्ण रूप से पालन किया गया।

समिति का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पुनर्वास नीति के आधार पर की गई थी, लेकिन आज तक प्रभावित परिवार अपने अधिकारों से वंचित हैं, जिससे क्षेत्र में गहरा असंतोष व्याप्त है।

कलेक्टर को सौंपा गया था ज्ञापन

समिति के अनुसार, 19 जनवरी 2026 को जिले के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में प्रमुख मांगें शामिल थीं-

योग्यतानुसार नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जाए। रोजगार न मिलने की स्थिति में रोजगार गारंटी योजना के तहत पिछले लगभग 15 वर्षों से देय बेरोजगारी भत्ते का भुगतान किया जाए। भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास से जुड़ी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि पुनर्वास नीति लागू नहीं की गई है तो भूमि वापसी की स्पष्ट प्रक्रिया तय की जाए।

समिति का आरोप है कि ज्ञापन के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या पहल नहीं की गई।

24 फरवरी को सांकेतिक धरना

भू-विस्थापितों एवं प्रभावितों की मांगों के समर्थन में 24 फरवरी को सुबह से सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। लारा संघर्ष समिति ने क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे आंदोलन में शामिल होकर विस्थापित परिवारों के न्यायपूर्ण अधिकारों के समर्थन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

यह आंदोलन एक बार फिर विकास परियोजनाओं और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन के प्रश्न को सामने ला रहा है।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena