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लाखासार से ‘गौधाम योजना’ का शुभारंभ आज: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 29 गौधाम की करेंगे शुरुआत, प्रदेश में 1460 गौधाम विकसित करने का लक्

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में निराश्रित और घुमंतू पशुधन के संरक्षण की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। विष्णु देव साय बिलासपुर जिले के लाखासार से राज्य की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में निराश्रित और घुमंतू पशुओं के संरक्षण, संवर्धन और व्यवस्थित देखभाल के लिए चरणबद्ध तरीके से गौधाम स्थापित किए जाएंगे।

सरकार की योजना के तहत आज प्रदेश के 29 स्थानों पर एक साथ गौधाम की शुरुआत की जाएगी। यह इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रारंभिक कड़ी होगी। राज्य सरकार ने पहले चरण में 152 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि आगामी चरणों में इसका विस्तार करते हुए पूरे प्रदेश में 1460 गौधाम विकसित करने की योजना बनाई गई है।

सरकार का मानना है कि इस योजना से प्रदेश में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। अक्सर ये पशु सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं और स्वयं भी दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं। गौधाम स्थापित होने से ऐसे पशुओं को सुरक्षित आश्रय, भोजन और चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

गौधाम योजना को केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा जा रहा है। गौधामों में गोबर और गोमूत्र के उपयोग से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे किसानों और स्वयं सहायता समूहों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने की पहल

राज्य सरकार का कहना है कि यह योजना केवल प्रशासनिक पहल नहीं है, बल्कि समाज में पशु संरक्षण और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करने का भी प्रयास है। गौवंश भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में निराश्रित पशुओं के संरक्षण के लिए संगठित प्रयास समय की आवश्यकता माने जा रहे हैं।

चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार

सरकार के अनुसार गौधामों के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। पहले चरण में चयनित स्थानों पर गौधाम स्थापित कर उनके संचालन का मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसके बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों और विकासखंडों तक विस्तार दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है, तो यह न केवल निराश्रित पशुओं की समस्या को कम करने में मददगार होगी, बल्कि गौ आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri