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कोविड के बाद कान की असहनीय पीड़ा से पुनर्जन्म तक: मेरा निजी अनुभव

समर्पण, संवेदनशीलता और सटीक इलाज का अद्भुत उदाहरण-डॉ. अनिल जैन

✍🏻पंडित कान्हा शास्त्री

रायपुर । कोविड-19 महामारी ने हम सबके जीवन में किसी न किसी रूप में असर डाला, लेकिन मेरे लिए यह एक ऐसी परीक्षा बनकर आया, जिसने मेरे अस्तित्व, मेरे आत्मविश्वास और मेरे सामाजिक जीवन तीनों को हिला कर रख दिया।

संक्रमण के कुछ समय बाद ही मेरे कान में अचानक दर्द शुरू हुआ। शुरुआत में यह एक सामान्य समस्या लगी, लेकिन धीरे-धीरे यह पीड़ा मेरे जीवन का स्थायी हिस्सा बन गई। हर समय रहने वाला दर्द, तेज आवाज से असहनीय इरिटेशन और सुनने में लगातार बढ़ती कठिनाई ने मुझे भीतर से तोड़ना शुरू कर दिया।

स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मैंने लोगों से बातचीत करना लगभग बंद कर दिया। जो व्यक्ति समाज, संवाद और विचारों के आदान-प्रदान में विश्वास रखता हो, उसके लिए यह स्थिति किसी मानसिक कैद से कम नहीं होती। मैं धीरे-धीरे भीड़ से दूर, एकांत में सिमटता चला गया। मेरा दैनिक जीवन, मेरा कार्यक्षेत्र सब कुछ प्रभावित हो रहा था।

उपचार की तलाश में मैंने हार नहीं मानी। बिलासपुर, रायपुर, मुंबई और दिल्ली देश के कई बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाए। हर जगह उम्मीद लेकर गया, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। इतने लंबे समय तक इलाज के बावजूद जब एक प्रतिशत भी सुधार नहीं हुआ, तो मन में कहीं न कहीं यह भय घर करने लगा कि शायद अब यह समस्या जीवनभर साथ रहने वाली है।

इसी कठिन दौर में मेरे आदरणीय श्री अनिल शर्मा जी ने मुझे रायपुर स्थित रूपजीवन हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर अनिल जैन जी के बारे में बताया। सच कहूं तो उस समय तक मैं इतना थक चुका था कि किसी नए डॉक्टर के पास जाने की इच्छा भी समाप्त हो चुकी थी।

लेकिन परिवार के बार-बार आग्रह और भीतर कहीं एक अंतिम उम्मीद के सहारे, मैंने उनसे मिलने का निर्णय लिया।

पहली ही मुलाकात ने मेरे भीतर एक अलग भरोसा जगाया। डॉक्टर साहब ने न केवल मेरे सभी पुराने रिपोर्ट्स को गंभीरता से देखा, बल्कि मेरी पूरी समस्या को धैर्यपूर्वक सुना और समझा। आज के समय में, जब चिकित्सा अक्सर औपचारिकता बनती जा रही है, उनका यह समर्पण मेरे लिए आश्वस्त करने वाला था।

जांचें कराई गईं-और आश्चर्य की बात यह रही कि अधिकांश रिपोर्ट सामान्य थीं। लेकिन मेरी पीड़ा सामान्य नहीं थी। यही वह बिंदु था, जहां मुझे लगा कि यह डॉक्टर सिर्फ रिपोर्ट नहीं, बल्कि मरीज को समझने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने बार-बार मेरी फाइल को देखा, हर संभावना पर विचार किया और अंततः यह स्वीकार किया कि कुछ जटिल परिस्थितियों में इस प्रकार की समस्या सामने आती है। उपचार आगे बढ़ाया गया, दवाइयां दी गईं, लेकिन जब अपेक्षित लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने एक बार फिर पूरी स्थिति का गहन अध्ययन किया।

अंततः सर्जरी का निर्णय लिया गया। यह मेरे लिए एक बड़ा और संवेदनशील फैसला था, लेकिन डॉक्टर साहब के आत्मविश्वास और उनके आश्वासन ने मेरे भीतर साहस भर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा-“आप चिंता न करें, हम पूरी कोशिश करेंगे।”

सर्जरी के बाद धीरे-धीरे जो परिवर्तन शुरू हुआ, वह मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। वह दर्द, जिसने मुझे भीतर से तोड़ दिया था, अब कम होने लगा। सुनने की क्षमता में सुधार हुआ और सबसे महत्वपूर्ण-मेरा आत्मविश्वास वापस लौटने लगा।

आज मैं फिर से अपने जीवन में सक्रिय हूँ। लोगों से संवाद कर पा रहा हूँ, अपने कार्यों में पूरी ऊर्जा के साथ लौट चुका हूँ। जो एक समय मुझे असंभव लगता था, वह आज मेरे सामने एक नई शुरुआत के रूप में खड़ा है।

इस पूरे अनुभव ने मुझे एक गहरा जीवन-संदेश दिया है-सही मार्गदर्शन, धैर्य और विश्वास के साथ, सबसे कठिन परिस्थितियों से भी बाहर निकला जा सकता है।

मैं हृदय से डॉक्टर अनिल जैन जी एवं रूपजीवन हॉस्पिटल की पूरी टीम का आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे केवल उपचार ही नहीं, बल्कि जीवन में पुनः विश्वास भी लौटाया।

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Kanha Shastri

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