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छाल माइंस में श्रमिकों की शिकायतों की जांच पूरी, कमेटी ने पाई गड़बड़ियां; अब कार्रवाई का इंतजार

रायगढ़। छाल माइंस में ठेका कंपनी के खिलाफ श्रमिकों द्वारा की गई शिकायतों के बाद कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति ने अपनी पड़ताल पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने माइंस का निरीक्षण करने के साथ श्रमिकों के बयान भी दर्ज किए। जांच के दौरान श्रमिकों की ओर से लगाए गए कुछ आरोप सही पाए जाने की बात सामने आई है। अब मामले में प्रशासन द्वारा आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

कलेक्टर द्वारा गठित समिति में डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत, सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम पाणिग्राही, उप संचालक आईएचएसडी राहुल पटेल, खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी और संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार शामिल थे। समिति ने छाल माइंस का निरीक्षण कर श्रमिकों से उनकी नियुक्ति, हाजिरी, मजदूरी, बीमा और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी ली।

श्रमिकों की ओर से आरोप लगाया गया था कि माइंस में सभी श्रमिकों की नियमित हाजिरी दर्ज नहीं की जाती और भुगतान में भी अनियमितता बरती जाती है। आरोप यह भी है कि सभी श्रमिकों को निर्धारित एचपीसी दर के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा। कुछ श्रमिकों का भुगतान रिकॉर्ड में निर्धारित दर के अनुसार दिखाए जाने, जबकि वास्तविक भुगतान कम किए जाने की शिकायत सामने आई है। इसके अलावा श्रमिकों के बीमा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

रायगढ़ जिले की कोयला खदानों में बड़ी संख्या में श्रमिक ठेका व्यवस्था के माध्यम से कार्यरत हैं। आरोप है कि खदान संचालक कंपनियां कई कार्य ठेका कंपनियों को सौंपती हैं और आगे श्रमिकों की नियुक्ति तथा मैनपावर की व्यवस्था लेबर ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है। ऐसे में श्रमिकों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अन्य खदानों की जांच की मांग

छाल माइंस में जांच के बाद अब जिले की अन्य खदानों में भी इसी तरह की शिकायतों की जांच की मांग उठने लगी है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि एक खदान में मजदूरी, हाजिरी, बीमा और सुरक्षा से जुड़ी अनियमितताएं सामने आती हैं तो अन्य खदानों में भी श्रम कानूनों और निर्धारित मजदूरी व्यवस्था की जांच की जानी चाहिए।

रायगढ़ जिले में एसईसीएल, एनटीपीसी, जेपीएल, हिंडाल्को, अंबुजा सीमेंट्स, सारडा एनर्जी और सीएसपीजीसीएल सहित विभिन्न औद्योगिक एवं खनन संस्थानों में ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में प्रशासन की आगामी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित ठेका कंपनी के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या जिले की अन्य खदानों में भी व्यापक जांच शुरू की जाएगी।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena