Skip to content

अविवाहित कर्मचारी की मृत्यु पर विवाहित बहन भी हो सकती है अनुकंपा नियुक्ति की हकदार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी विवाहित बहन को केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि विवाह किसी महिला के संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने का आधार नहीं हो सकता और राज्य को समानता के सिद्धांत के अनुरूप निर्णय लेना होगा।

मामला बिलासपुर निवासी एवं लोक अभियोजन अधिकारी दुर्गेश मिश्रा से जुड़ा है, जिनका 13 जून 2018 को निधन हो गया था। उनके अविवाहित होने के कारण परिवार में उनकी विवाहित बहन अमिता दुबे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। हालांकि राज्य शासन ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि प्रचलित अनुकंपा नियुक्ति नीति में विवाहित बहन के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए अमिता दुबे ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि केवल महिला के विवाहित होने के आधार पर उसे अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना संविधान के समानता और भेदभाव-निषेध के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट ने राज्य शासन के अस्वीकृति आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन पर कानून और न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप पुनर्विचार करें तथा चार सप्ताह के भीतर नया निर्णय जारी करें।

इस निर्णय को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक साबित हो सकता है, जहां किसी अविवाहित सरकारी कर्मचारी के आश्रित के रूप में विवाहित बहन नियुक्ति की पात्रता का दावा करती है। साथ ही, यह निर्णय महिलाओं के समान अधिकार और लैंगिक समानता के संवैधानिक सिद्धांतों को भी मजबूती प्रदान करता है।

ख़बर शेयर करें:

Description of the image
Kanha Shastri

Kanha Shastri