Skip to content

ओम रूपेश स्टील प्लांट हादसा: एक गर्भवती मजदूर की मौत ने खोली व्यवस्थाओं की परतें

कांग्रेस जांच दल ने उठाए श्रमिक सुरक्षा, पर्यावरण और भूमि अतिक्रमण के गंभीर सवाल

रायगढ़, 24 जून 2026। रायगढ़ जिले के चिराईपानी-लाखा क्षेत्र स्थित ओम रूपेश स्टील प्राइवेट लिमिटेड में हुई दर्दनाक दुर्घटना अब केवल एक औद्योगिक हादसा भर नहीं रह गई है। एक गर्भवती महिला मजदूर की मौत और अन्य मजदूरों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने कंपनी प्रबंधन, श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था, पर्यावरणीय नियमों के पालन तथा कथित भूमि अतिक्रमण जैसे अनेक मुद्दों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

घटना के बाद क्षेत्र में बढ़ते जनाक्रोश और लगातार उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस द्वारा गठित जांच दल ने घटनास्थल का दौरा कर स्थानीय ग्रामीणों, श्रमिकों तथा जनप्रतिनिधियों से चर्चा की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

हादसे ने छीनी एक गर्भवती महिला की जिंदगी

ग्रामीणों के अनुसार तेज आंधी और बारिश के दौरान प्लांट परिसर के समीप स्थित एक ऊंची दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार के नीचे श्रमिकों के अस्थायी आवास प्रभावित हुए, जिसमें कई मजदूर दब गए। हादसे में एक गर्भवती महिला मजदूर की मृत्यु हो गई, जबकि अन्य घायल मजदूरों का उपचार जारी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों के रहने की व्यवस्था बेहद असुरक्षित थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी लंबे समय से की जा रही थी। उनका कहना है कि यदि श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवास और उचित निगरानी व्यवस्था होती तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।

जांच दल पहुंचा मौके पर, कई सवालों के जवाब तलाशे

चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव के नेतृत्व में कांग्रेस जांच दल घटनास्थल पहुंचा। दल में पूर्व विधायक प्रकाश नायक, लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार तथा नेता प्रतिपक्ष सलीम निहारिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल थे।

विशेष बात यह रही कि स्थानीय भाजपा जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। इससे यह संदेश गया कि दुर्घटना को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जवाबदेही की मांग की जा रही है।

श्रमिक आवासों को लेकर उठे सवाल

जांच के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि हादसे के बाद मजदूरों के रहने वाले टिन-शेड और अस्थायी आवासों को हटाने का प्रयास किया गया। लोगों का आरोप है कि इससे वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश की गई।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मजदूर लंबे समय से अत्यंत सीमित सुविधाओं में रहने को मजबूर थे।

दो करोड़ मुआवजा और आपराधिक कार्रवाई की मांग

जांच दल के अध्यक्ष विधायक रामकुमार यादव ने मृतक महिला के परिवार को दो करोड़ रुपये तथा घायलों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है।

उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। यादव का कहना है कि यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

दीवार गिरने के पीछे क्या था कारण?

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी द्वारा दीवार के समीप बड़े पैमाने पर खुदाई कर गड्ढे बनाए गए थे। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर गया, जिससे दीवार की नींव कमजोर पड़ गई। लोगों का दावा है कि तेज आंधी के दौरान इसी कारण दीवार ढह गई।

स्थानीय लोग इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

भूमि अतिक्रमण के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें

दुर्घटना के साथ-साथ कंपनी पर भूमि संबंधी गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि गांव के तालाब और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं और राजस्व अमले द्वारा प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब ग्रामीण इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

पर्यावरणीय नियमों के पालन पर भी सवाल

क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्लांट से होने वाले प्रदूषण को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि उद्योग परिसर में अपेक्षित ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की गई है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन नहीं हो रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय निकलने वाली धूल और राख का असर आसपास के घरों तक महसूस किया जाता है। लोगों ने पर्यावरण विभाग से स्वतंत्र निरीक्षण कराने की मांग की है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में एक ही प्रश्न उठ रहा है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?

एक ओर मृतक परिवार न्याय और मुआवजे की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भूमि संबंधी शिकायतों की व्यापक जांच चाहते हैं।

अब जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पर्यावरण विभाग तथा राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं। यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा, पर्यावरणीय जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।

ख़बर शेयर करें:

Description of the image
Kanha Shastri

Kanha Shastri