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रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी— पंडित कान्हा शास्त्री

रायगढ़ । संपादकीय

हाल ही में छत्तीसगढ़ में एक सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्ची की मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। परिजनों का आरोप है कि समय पर पर्याप्त रक्त उपलब्ध नहीं हो सका। चाहे जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएं, लेकिन इस घटना ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या आज भी किसी मरीज की जान केवल रक्त की अनुपलब्धता के कारण जानी चाहिए?

सिकल सेल, थैलेसीमिया, गंभीर एनीमिया, दुर्घटनाओं और गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न जटिल परिस्थितियों में रक्त जीवनरक्षक भूमिका निभाता है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में लोग सिकल सेल रोग से प्रभावित हैं, वहां रक्त की नियमित उपलब्धता स्वास्थ्य व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होनी चाहिए। ऐसे मरीजों को बार-बार रक्त की आवश्यकता पड़ती है और थोड़ी सी देरी भी गंभीर परिणाम ला सकती है।

राज्य सरकार को रक्त बैंकों की क्षमता बढ़ाने, जिलों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने तथा सिकल सेल, थैलेसीमिया और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रक्त सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही रक्तदान को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है। केवल आवश्यकता पड़ने पर रक्तदाताओं की तलाश करने के बजाय समाज में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति विकसित करनी होगी।

यह भी सच है कि रक्त किसी फैक्ट्री में नहीं बनता, इसका एकमात्र स्रोत मानव ही है। इसलिए समाज की भी उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी सरकार की। यदि प्रत्येक स्वस्थ नागरिक वर्ष में एक-दो बार रक्तदान करने का संकल्प ले, तो रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी रक्तदान का विशेष महत्व है। वैदिक ज्योतिष में रक्त, ऊर्जा, साहस और जीवन शक्ति का संबंध मंगल ग्रह से माना गया है। जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से रक्तदान करता है, तो वह केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता की पूर्ति नहीं करता, बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति के जीवन की रक्षा में सहभागी बनता है। भारतीय परंपरा में प्राणरक्षा को सर्वोच्च धर्म माना गया है और इसी कारण रक्तदान को आधुनिक युग का महादान कहा जाता है। ज्योतिष हमें केवल ग्रहों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि समाज और मानवता के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराता है। इसलिए रक्तदान को सेवा, संवेदना और लोककल्याण के श्रेष्ठ कार्य के रूप में देखा जाना चाहिए।

14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह अवसर केवल रक्तदाताओं के सम्मान का नहीं, बल्कि समाज को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का भी है। आवश्यकता इस बात की है कि रक्तदान को एक नियमित सामाजिक संस्कार बनाया जाए, ताकि किसी भी परिवार को रक्त की तलाश में भटकना न पड़े।

आज आवश्यकता आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि सकारात्मक पहल की है। सरकार को रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी चाहिए और समाज को रक्तदान के प्रति अधिक जागरूक होना चाहिए। किसी भी मरीज, विशेषकर सिकल सेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों तथा गर्भवती माताओं को केवल रक्त की कमी के कारण जीवन न गंवाना पड़े, यही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।

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Kanha Shastri

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