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7 जुलाई से बुध होंगे वक्री, 23 जुलाई तक रहेगा प्रभाव; नौकरी, व्यापार, प्रेम और स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

रायगढ़। बुद्धि, वाणी, व्यापार, संचार और तर्कशक्ति के कारक बुध ग्रह 7 जुलाई 2026 से अपनी स्वराशि मिथुन में वक्री होने जा रहे हैं। यह वक्री अवस्था 23 जुलाई 2026 तक रहेगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध के वक्री होने पर संचार, तकनीक, व्यापारिक निर्णय, दस्तावेजी कार्यों और मानवीय संबंधों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस अवधि में जहां कुछ लोगों के रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं, वहीं गलतफहमियां, निर्णय संबंधी भ्रम और आर्थिक मामलों में सतर्कता की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।

ज्योतिषिर्विद पं. कान्हा शास्त्री ने बताया कि बुध ग्रह जब अपनी ही राशि मिथुन में वक्री होते हैं, तब उनकी चेष्टा शक्ति बढ़ जाती है। ऐसे समय में पुराने अधूरे कार्य, पुराने संबंध, अटके हुए आर्थिक मामले और लंबे समय से लंबित योजनाएं पुनः सक्रिय हो सकती हैं। हालांकि यह समय नए कार्यों की शुरुआत से अधिक पुराने कार्यों की समीक्षा और सुधार के लिए अनुकूल माना जाता है।

उन्होंने बताया कि बुध ग्रह का सीधा संबंध बुद्धि, वाणी, लेखन, पत्रकारिता, शिक्षा, व्यापार, बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार माध्यमों से है। इसलिए इस अवधि में लोगों को अपने शब्दों और निर्णयों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। छोटी सी गलतफहमी भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।

पं. शास्त्री के अनुसार मेष राशि वालों को संवाद और यात्राओं में सावधानी रखनी होगी, जबकि वृषभ राशि के जातकों को धन और पारिवारिक मामलों में संयम बरतना चाहिए। मिथुन राशि के लोगों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देगा और उन्हें मानसिक तनाव तथा निर्णय संबंधी असमंजस का सामना करना पड़ सकता है।

कर्क राशि वालों के लिए यह समय अनावश्यक खर्च बढ़ाने वाला हो सकता है, जबकि सिंह राशि के जातकों को पुराने रुके हुए कार्यों और आर्थिक लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। कन्या राशि के लोगों को कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

तुला राशि के लिए यात्रा और कानूनी मामलों में सतर्कता आवश्यक रहेगी। वृश्चिक राशि के जातकों के सामने पुराने वित्तीय या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामले फिर उभर सकते हैं। धनु राशि वालों को वैवाहिक और व्यावसायिक साझेदारी में धैर्य बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

मकर राशि के जातकों को स्वास्थ्य और ऋण संबंधी मामलों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि कुंभ राशि वालों को प्रेम संबंधों और निवेश संबंधी निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मीन राशि के लिए पारिवारिक वातावरण और वाहन संबंधी मामलों में सतर्कता आवश्यक रहेगी।

ज्योतिषिर्विद पं. कान्हा शास्त्री ने कहा कि बुध वक्री काल में नए निवेश, बड़े अनुबंधों और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे भलीभांति पढ़ लेना चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, संचार माध्यमों और ऑनलाइन लेन-देन में भी अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बुध ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए बुधवार के दिन भगवान विष्णु की आराधना, “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप, हरी मूंग का दान तथा गौ सेवा विशेष लाभकारी मानी जाती है।

पं. शास्त्री के अनुसार 7 जुलाई से 23 जुलाई तक का यह समय आत्ममंथन, समीक्षा और अधूरे कार्यों को पूरा करने का अवसर प्रदान करेगा। जो लोग धैर्य, विवेक और संयम के साथ कार्य करेंगे, उनके लिए यह वक्री काल भविष्य की सफलता की मजबूत नींव साबित हो सकता है।

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Tarendra Dansena

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