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यूजर चार्ज पर यू-टर्न की राजनीति! 2022 में भाजपा सड़क पर, 2026 में कांग्रेस मैदान में

पहले विरोध, अब समर्थन! यूजर चार्ज पर रायपुर में छिड़ी सियासी जंग”

रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम द्वारा यूजर चार्ज और संपत्ति कर में बढ़ोतरी का फैसला अब सियासी अखाड़े में बदल गया है। एक ओर कांग्रेस इसे महंगाई के दौर में जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा कह रही है कि जिस व्यवस्था का विरोध आज कांग्रेस कर रही है, उसकी नींव उसी के शासनकाल में रखी गई थी।

दरअसल, नगर निगम द्वारा यूजर चार्ज में बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं है, कई इलाकों में नियमित कचरा संग्रहण नहीं हो रहा है, ऐसे में नागरिकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भाजपा सरकार और नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है। पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में यूजर चार्ज बढ़ाकर आम आदमी की जेब पर नया बोझ डाला जा रहा है।

हालांकि भाजपा और नगर निगम का जवाब भी उतना ही तीखा है। महापौर मीनल चौबे ने कांग्रेस पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2022 में कांग्रेस परिषद ने ही यूजर चार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया था। उस समय भाजपा ने सामान्य सभा में इसका जोरदार विरोध किया था।

2022 का विवाद फिर चर्चा में

15 मार्च 2022 की सामान्य सभा आज फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। उस समय तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने संपत्ति कर और यूजर चार्ज पर चर्चा की मांग की थी। चर्चा टाले जाने पर भाजपा पार्षदों ने सदन में हंगामा किया, नारेबाजी की और आसंदी का घेराव किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि भाजपा के आठ पार्षदों को निलंबित करना पड़ा था।

बाद में भाजपा पार्षद सदन से बाहर चले गए और मामला इतना बढ़ा कि सामान्य सभा स्थगित करनी पड़ी। अब वही मुद्दा एक बार फिर राजनीति के केंद्र में है, फर्क सिर्फ इतना है कि तब विरोध में भाजपा थी और आज कांग्रेस है।

जनता का सवाल – पहले सफाई या पहले शुल्क?

सियासत से अलग आम नागरिकों और व्यापारियों की चिंता कुछ और है। उनका कहना है कि शहर के कई हिस्सों में आज भी नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई स्थानों पर कचरा समय पर नहीं उठाया जाता। ऐसे में यदि सेवाएं अधूरी हैं तो शुल्क बढ़ाने का औचित्य क्या है?

व्यापारी अशोक पटेल का कहना है कि बेहतर सेवा के बिना अतिरिक्त शुल्क वसूली जनता के साथ न्याय नहीं है। वहीं नागरिक हीरालाल का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच परिवार का बजट संभालना पहले ही मुश्किल हो गया है।

नगर निगम का पक्ष

नगर निगम का तर्क है कि घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे के परिवहन और सफाई व्यवस्था के संचालन पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली एजेंसी को भुगतान भी यूजर चार्ज से किया जाता है। निगम का कहना है कि बढ़ोतरी तय प्रक्रिया और शासन के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

महापौर मीनल चौबे ने यह भी स्वीकार किया कि अभी शहर में शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं हो पा रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए एजेंसियों की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी।

कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान

यूजर चार्ज वृद्धि के विरोध में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने तेलीबांधा तालाब के पास हस्ताक्षर अभियान चलाया। कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में नागरिकों ने इसमें भाग लेकर यूजर चार्ज वृद्धि और महंगाई के खिलाफ अपना समर्थन दर्ज कराया है।

बड़ा सवाल

रायपुर की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नगर निगम पहले नागरिकों को बेहतर सफाई व्यवस्था देगा और फिर शुल्क बढ़ाएगा, या फिर बढ़े हुए यूजर चार्ज का विरोध आने वाले दिनों में बड़ा जन आंदोलन बनेगा? फिलहाल यूजर चार्ज का मुद्दा सिर्फ सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनता की जेब और राजनीतिक विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।

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Tarendra Dansena

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