Skip to content

पेल्मा ओपनकास्ट कोल माइंस जनसुनवाई 8 जून को तय, तमनार क्षेत्र में मुआवजा और पुनर्वास को लेकर उबाल बरकरार

रायगढ़,25 मई 2026। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित पेल्मा ओपनकास्ट कोल माइंस परियोजना को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। बीते 19 मई को भारी विरोध और स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियों के चलते स्थगित की गई जनसुनवाई अब पुनः 8 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) द्वारा जारी नवीन आदेश के तहत लिया गया है। यह परियोजना सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी South Eastern Coalfields Limited से संबंधित है, जो क्षेत्र में कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।

प्रस्तावित पेल्मा ओपनकास्ट कोल परियोजना लगभग 2077 हेक्टेयर भूमि में विकसित की जा रही है और इसका वार्षिक उत्पादन लक्ष्य लगभग 15 मिलियन टन कोयला निर्धारित किया गया है। यह परियोजना ओपनकास्ट खनन तकनीक पर आधारित होगी, जिससे बड़े पैमाने पर भूमि उपयोग और स्थानीय भू-परिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना के कारण तमनार क्षेत्र के पेल्मा, उरबा, मडुवाडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडिह, खर्रा, सक्ता और मिलूपारा जैसे कुल नौ गांव सीधे प्रभावित होंगे, जहां भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है।

स्थानीय ग्रामीणों और किसानों द्वारा इस परियोजना को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है। उनकी प्रमुख मांग है कि सभी प्रभावित गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए एक समान मुआवजा दर लागू की जाए ताकि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। इसके साथ ही ग्रामीणों की यह भी मांग है कि जिन परिवारों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें स्थायी रोजगार की गारंटी दी जाए। साथ ही पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की भी आवश्यकता जताई जा रही है ताकि विस्थापित परिवारों को भविष्य में किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

19 मई को हुई जनसुनवाई के दौरान भारी विरोध और असंतोष के कारण प्रशासन को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी, जिसके बाद अब नई तारीख तय की गई है। इस निर्णय के बाद क्षेत्र में एक बार फिर तनाव और सक्रियता बढ़ गई है तथा ग्रामीण संगठनों के स्तर पर आगामी सुनवाई को लेकर रणनीति बनाई जा रही है।

तमनार क्षेत्र पहले से ही खनन गतिविधियों से प्रभावित रहा है, और इस नई परियोजना के जुड़ने से क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ने की आशंका है। एक ओर इसे ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कृषि भूमि, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय आजीविका पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की निगाहें 8 जून 2026 को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं, जो इस परियोजना की दिशा और भविष्य तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

ख़बर शेयर करें:

Description of the image
Kanha Shastri

Kanha Shastri