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शराब ने छीना मां का जीवन: रायगढ़ की घटना ने फिर खड़े किए बड़े सवाल

धरमजयगढ़ । रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में हुई बुजुर्ग महिला की हत्या केवल एक पारिवारिक अपराध नहीं, बल्कि समाज में तेजी से फैलती नशे की भयावह प्रवृत्ति का आईना बन गई है। शराब के नशे में एक बेटे द्वारा अपनी ही मां को डंडे से पीट-पीटकर मार डालना और अपनी मासूम बेटी को गंभीर रूप से घायल कर देना पूरे समाज को झकझोर देने वाली घटना है। यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उस सामाजिक संकट की चेतावनी है, जो गांव-गांव और घर-घर में धीरे-धीरे जड़ें जमा रहा है।  

जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के मुड़ाटिकरा मोहल्ले में रहने वाली 70 वर्षीय मिरीना लकड़ा शनिवार रात अपनी 9 वर्षीय नातिन अगस्तिना लकड़ा के साथ घर पर थीं। इसी दौरान शराब के नशे में आरोपी बेटा घर पहुंचा और विवाद के बाद हिंसक हो उठा। उसने डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर अपनी मां की जान ले ली। बीच-बचाव करने आई मासूम बच्ची भी उसके गुस्से का शिकार हो गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद इलाके में भय, आक्रोश और शोक का माहौल है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि शराब अब केवल व्यक्तिगत आदत नहीं रही, बल्कि सामाजिक विनाश का कारण बनती जा रही है। नशे की गिरफ्त में आकर लोग अपने रिश्तों, जिम्मेदारियों और संवेदनाओं तक को भूलते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भी अपने एक फैसले में अत्यधिक शराब सेवन को परिवार के लिए मानसिक क्रूरता और सामाजिक विघटन का कारण बता चुका है। अदालत ने माना था कि शराब की लत परिवारों को तोड़ती है और बच्चों तक पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।  

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चिंताजनक होती जा रही है। रोज कमाने-खाने वाले परिवारों की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खत्म हो रहा है। इसके कारण घरेलू हिंसा, हत्या, सड़क हादसे और सामाजिक अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। कई गांवों में महिलाएं लंबे समय से शराब दुकानों के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आता।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर ऐसी घटनाओं के बाद भी समाज और शासन कब जागेगा? क्या केवल कार्रवाई और गिरफ्तारी पर्याप्त है, या फिर शराबबंदी, नशामुक्ति अभियान और ग्रामीण जागरूकता पर गंभीर नीति बनाने की जरूरत है? जिस मां ने बेटे को जन्म देकर बड़ा किया, उसी मां की मौत उसके ही हाथों होना समाज के नैतिक पतन की सबसे दर्दनाक तस्वीर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नशे पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पारिवारिक अपराध और सामाजिक हिंसा के मामले और बढ़ सकते हैं। जरूरत केवल कानून की नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और सरकार के संयुक्त प्रयास की है। गांव स्तर पर नशामुक्ति अभियान, परामर्श केंद्र, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शराब की उपलब्धता पर सख्त निगरानी अब समय की मांग बन चुकी है।

रायगढ़ की यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि शासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है यदि नशे के खिलाफ निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे कई घर उजड़ते रहेंगे और मासूम बच्चों का भविष्य हिंसा की आग में झुलसता रहेगा।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena