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रायपुर में मॉल पार्किंग पर बड़ा फैसला: राज्य उपभोक्ता फोरम ने वसूली को ठहराया अवैध, मुआवजे का आदेश

रायपुर । रायपुर में मॉल पार्किंग शुल्क को लेकर एक अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सामने आया है, जिसने उपभोक्ता अधिकारों की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। राज्य उपभोक्ता फोरम ने अपने स्पष्ट और सख्त आदेश में कहा है कि किसी भी शॉपिंग मॉल द्वारा पार्किंग के नाम पर अलग से शुल्क वसूलना अवैध है, क्योंकि यह सुविधा उपभोक्ताओं के लिए बुनियादी मानी जाएगी। इस फैसले के बाद यह मुद्दा सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश के मॉल संचालन और उनकी नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं।

पूरा मामला अंबूजा मॉल से जुड़ा हुआ है, जहां पार्किंग शुल्क को लेकर अधिवक्ता अंजिनेश शुक्ला ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान फोरम ने पाया कि मॉल प्रबंधन उपभोक्ताओं से ऐसी सेवा के लिए शुल्क ले रहा है, जो पहले से ही मॉल के संचालन का अभिन्न हिस्सा है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए फोरम ने न सिर्फ पार्किंग शुल्क को तुरंत समाप्त करने का निर्देश दिया, बल्कि मॉल प्रबंधन को शिकायतकर्ता को 50,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये कानूनी खर्च देने का आदेश भी दिया। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

फोरम के निर्णय में यह भी रेखांकित किया गया कि मॉल में आने वाला हर व्यक्ति पहले ही वस्तुओं और सेवाओं पर कर और कीमत चुका रहा होता है, ऐसे में पार्किंग के नाम पर अतिरिक्त वसूली करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाता है, तो यह देशभर में मॉल संस्कृति के लिए एक मिसाल बन सकता है और उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।

हालांकि आदेश के बाद भी स्थिति पूरी तरह बदली नहीं है। रायपुर के कई बड़े मॉल्स में अब भी 10 से 30 रुपये तक की पार्किंग फीस वसूली जा रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या मॉल प्रबंधन जानबूझकर आदेश की अनदेखी कर रहा है, या फिर प्रशासनिक स्तर पर इसे लागू कराने में ढिलाई बरती जा रही है। इस विषय पर जब मॉल प्रबंधन से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कोई भी आधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया, जिससे पारदर्शिता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।

इस घटनाक्रम ने प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। यदि उपभोक्ता फोरम के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमों का पालन नहीं होता है, तो यह न्यायिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी असर डाल सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या आम उपभोक्ताओं को वास्तव में इस फैसले का लाभ मिल पाता है, या फिर यह आदेश भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri