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महादेव ऐप की तर्ज पर खड़ा हुआ सट्टे का साम्राज्य: बाबू खेमानी निकला मास्टरमाइंड, फाइव स्टार होटलों से चलता था पूरा नेटवर्क

रायपुर। सोशल मीडिया पर लग्जरी लाइफस्टाइल और रील्स के जरिए हजारों फॉलोअर्स जुटाने वाला इंफ्लुएंसर बाबू उर्फ गुलशन खेमानी अब ऑनलाइन सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क का मास्टरमाइंड निकला है। रायपुर पुलिस की कार्रवाई में इस हाई-टेक सट्टा गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है, जो कुख्यात महादेव ऐप की तर्ज पर पूरे देश में फैलाया गया था। पुलिस ने मुंबई और गोवा में दबिश देकर बाबू खेमानी, उसके भाई करण खेमानी और अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि बाबू खेमानी ने महादेव ऐप के ऑपरेटिंग पैटर्न को अपनाते हुए अपना खुद का सट्टा नेटवर्क खड़ा किया था। यह नेटवर्क अत्याधुनिक तकनीक और संगठित सिस्टम के जरिए संचालित होता था। क्रिकेट मैच शुरू होते ही बाबू और उसके साथी रायपुर छोड़कर मुंबई या गोवा के फाइव स्टार होटलों में शिफ्ट हो जाते थे, जहां से पूरे देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी को कंट्रोल किया जाता था। इन होटलों में ही कंट्रोल रूम बनाकर पैनल के जरिए सट्टे की पूरी निगरानी और संचालन किया जाता था।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के तहत कई फर्जी नामों से 55 एक्सचेंज, तीन मुख्य कंट्रोल रूम और दर्जनों ग्रुप संचालित किए जा रहे थे। इन ग्रुप्स के जरिए सटोरियों को जोड़ा जाता था और उन्हें 25 प्रतिशत कमीशन पर आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। यही आईडी सट्टा खेलने और खिलाने का मुख्य माध्यम थी। नेटवर्क का विस्तार इतना बड़ा था कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, गोवा और ओडिशा तक इसकी पहुंच थी।

इस पूरे रैकेट में काम का बंटवारा भी सुनियोजित तरीके से किया गया था। रायपुर में सट्टे की रकम की वसूली और लोकल नेटवर्क को संभालने की जिम्मेदारी सहयोगियों को दी गई थी, जबकि बाबू और उसका करीबी गिरोह हाई-लेवल ऑपरेशन और तकनीकी कंट्रोल अपने हाथ में रखते थे। ऑनलाइन पैनल के जरिए हर लेन-देन का हिसाब रखा जाता था, जिससे पूरा नेटवर्क बेहद प्रोफेशनल तरीके से संचालित हो रहा था।

रायपुर पुलिस ने इससे पहले ओडिशा, रायपुर और दुर्ग में छापेमारी कर करीब 20 सटोरियों को गिरफ्तार किया था, जो इसी नेटवर्क का हिस्सा थे। इन गिरफ्तारियों के बाद ही पुलिस को इस बड़े सिंडिकेट के तार बाबू खेमानी तक जुड़े होने के पुख्ता सबूत मिले। फिलहाल पुलिस ने बाबू को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नामों और आर्थिक लेन-देन की परतें खुलने की उम्मीद है।

यह पूरा मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि किस तरह सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे संगठित अपराध अपने पैर पसार रहा है। महादेव ऐप जैसे मामलों के बाद भी इस तरह के नए नेटवर्क का सामने आना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह युवाओं को गलत दिशा में ले जाने वाली एक गंभीर सामाजिक समस्या भी बनता जा रहा है। पुलिस अब इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, हवाला कनेक्शन और अन्य राज्यों में फैले इसके नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri