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जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला: अमित जोगी को उम्रकैद

रायपुर | 06 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। करीब 23 वर्षों बाद आए इस फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

हाईकोर्ट की डिविजन बेंच- रमेश सिन्हा और अरविंद वर्मा ने वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी के फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया था।

अदालत की टिप्पणी: समान साक्ष्य, तो समान व्यवहार

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि-यदि सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्य मौजूद हों तो किसी एक को अलग से बरी करना न्यायसंगत नहीं है बिना ठोस कारण के ऐसा करना न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है

क्या है पूरा मामला?

साल 2003 में रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में मामला लूटपाट का प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में जांच में इसे सुनियोजित साजिश पाया गया। मामले की जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई।

किन धाराओं में सजा?

हालांकि अपराध वर्ष 2003 का है, उस समय IPC (भारतीय दंड संहिता) लागू थी, लेकिन वर्तमान कानूनी परिप्रेक्ष्य में इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार इस प्रकार समझा जा सकता है:

धारा 103 BNS → हत्या (पूर्व IPC 302) धारा 61 BNS → आपराधिक साजिश (पूर्व IPC 120-B)

अदालत ने अमित जोगी को: IPC धारा 302 (हत्या) IPC धारा 120-बी (आपराधिक साजिश)

के तहत दोषी मानते हुए: उम्रकैद की सजा सुनाई है ।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी, जिससे हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लग गई।

करीब दो दशक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आए इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून के सामने सभी समान हैं। यह निर्णय न केवल पीड़ित पक्ष के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और दृढ़ता को भी दर्शाता है।

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Tarendra Dansena

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