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बीजापुर छात्रावास मामला: कांग्रेस प्रवक्ता अनादि शुक्ला का बड़ा हमला, ‘पूर्व छात्रा’ बयान पर घिरी सरकार, सुरक्षा और जवाबदेही पर उठे तीखे सवाल

बीजापुर। बीजापुर के गंगालूर स्थित पोर्टा-केबिन आवासीय छात्रावास में तीन छात्राओं के गर्भवती पाए जाने के मामले ने अब प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण पर कांग्रेस प्रवक्ता अनादि शुक्ला ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे शिक्षा और सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जवाब देने के बजाय तकनीकी तर्कों में उलझकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।

‘पूर्व छात्रा’ बयान पर कड़ा प्रहार

अनादि शुक्ला ने मंत्री के उस बयान पर सवाल उठाया जिसमें संबंधित लड़कियों को ‘पूर्व छात्रा’ बताया गया। उन्होंने कहा कि क्या ‘पूर्व छात्रा’ होने से अपराध की गंभीरता कम हो जाती है? यदि वे पूर्व छात्राएं थीं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वे छात्रावास परिसर के भीतर रह रही थीं या बाहर। यदि वे परिसर के भीतर थीं, तो यह प्रशासन की घोर लापरवाही है कि सरकारी छात्रावास में कोई भी बिना निगरानी के रह सकता है। उन्होंने पूछा कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था, वार्डन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या थी और उन्होंने समय रहते इस स्थिति को क्यों नहीं रोका।

बेटी तो छत्तीसगढ़ की है-संवेदनशीलता पर सवाल

शुक्ला ने कहा कि सरकार ‘वर्तमान’ और ‘पूर्व’ जैसे शब्दों में उलझकर असल मुद्दे से ध्यान भटका रही है, जबकि यह मामला प्रदेश की बेटियों की अस्मिता और सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, बेटी तो छत्तीसगढ़ की है, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? इस बयान के जरिए उन्होंने सरकार की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े किए।

सुरक्षा तंत्र पूरी तरह विफल-निगरानी पर गंभीर प्रश्न

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि छात्रावास में रहने वाली छात्राएं, जिनमें नाबालिग भी शामिल बताई जा रही हैं, महीनों तक गर्भवती रहती हैं और प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा छात्रावास प्रबंधन को इसकी जानकारी तक नहीं होती, तो यह स्पष्ट रूप से निगरानी तंत्र की पूर्ण विफलता है। उन्होंने कहा कि आवासीय छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग, महिला स्टाफ की सक्रियता और निरीक्षण व्यवस्था अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले ने साबित कर दिया है कि ये सभी व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित हैं।

अपराध के आंकड़ों से घिरी सरकार

अनादि शुक्ला ने प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच 1013 बलात्कार के मामले दर्ज होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ रही है- ना महिलाएं सड़कों पर सुरक्षित हैं और ना ही छात्रावासों में रहने वाली बेटियां।उन्होंने कहा कि यह आंकड़े सरकार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर दावों की पोल खोलते हैं।

शिक्षा बजट और जागरूकता पर उठे सवाल

इस मामले को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए शुक्ला ने 2026-27 के शिक्षा बजट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने ‘किशोर स्वास्थ्य और जागरूकता’ (Adolescence Education) के लिए कोई ठोस और अलग प्रावधान किया है या नहीं। उनका कहना था कि केवल घटनाओं के बाद निलंबन या कार्रवाई दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करना जरूरी है।

निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्रावास प्रबंधन से लेकर संबंधित विभागों तक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आदिवासी अंचलों में पढ़ने वाली बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। अंत में शुक्ला ने कहा कि यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। यदि सरकार अब भी इसे गंभीरता से नहीं लेती है, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बेटियों की सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे को कांग्रेस लगातार उठाती रहेगी।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri