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“22 लाख क्विंटल धान और 60 करोड़ चूहे!”: विधानसभा में गूंजा ‘चूहों का गणित’, विपक्ष ने सरकार को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को धान खरीदी और भंडारण को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। धान को चूहों द्वारा खाए जाने के मामले को लेकर विपक्ष ने सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया और चर्चा के लिए स्थगन की मांग की। इस दौरान विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए तीखे तंज भी कसे।

नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत ने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जितनी मात्रा में धान चूहों द्वारा खाए जाने की बात कही जा रही है, उसके लिए करीब 60 करोड़ चूहों की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि आखिर इतने चूहे प्रदेश में आए कहां से। महंत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार यह मानती है कि 22 लाख क्विंटल धान सचमुच चूहों ने खा लिया, या फिर यह किसी प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने का तरीका है।

“कहीं ये चूहे मंत्रालय में तो नहीं?”

सदन में बहस के दौरान विधायक उमेश पटेल ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये चूहे मंत्रालय में ही बैठे हों। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए हल्की हंसी का माहौल भी बन गया, हालांकि विपक्ष ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल

वहीं विधायक राघवेन्द्र सिंह ने धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई स्थानों पर धान की बोरियों में धान की जगह भूंसा भरे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो यह केवल भंडारण की समस्या नहीं बल्कि पूरे सिस्टम में गंभीर अनियमितता का संकेत है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

किसानों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा

धान छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में लाखों क्विंटल धान के नुकसान की खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विपक्ष का कहना है कि यदि भंडारण और निगरानी की व्यवस्था मजबूत होती तो इतनी बड़ी मात्रा में धान के नुकसान की नौबत नहीं आती।

अब इस मुद्दे पर सरकार के जवाब और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला सीधे प्रदेश के किसानों और सरकारी खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri