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भारत की ऊर्जा सुरक्षा संकट में: केवल 25 दिन का तेल स्टॉक, इजराइल-ईरान संघर्ष बढ़ा सकता वैश्विक तेल संकट

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज बंद, भारत ने रूस और अन्य देशों से वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्प तलाशे

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की आशंका के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा गंभीर चुनौती में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास अब केवल 25 दिनों का क्रूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है।

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का संकट

ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा की है और चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग लगा दी जाएगी। यह मार्ग ओमान और ईरान के बीच स्थित है और दुनिया के तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग के बंद होने से एशियाई देशों सहित कई देशों की तेल आपूर्ति प्रभावित होगी। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड की कीमत 80.41 डॉलर प्रति बैरल है, जो पिछले कुछ दिनों में 5.58% बढ़ चुकी है।

भारत का तेल भंडार और आपातकालीन स्थिति

देश में केवल 25 दिनों का क्रूड और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने से इनकार किया है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो घरेलू कीमतों पर असर पड़ सकता है।

रूस से तेल आयात बढ़ाने की योजना

तेल आपूर्ति संकट को देखते हुए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का विकल्प चुना है। सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी दिल्ली में आपातकालीन बैठक कर विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है जो फिलहाल भारतीय समुद्री क्षेत्र या नजदीकी एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं।

वैकल्पिक आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत ने मिडिल ईस्ट के अन्य तेल आपूर्तिकर्ताओं जैसे UAE, सऊदी अरब और कतर से संपर्क बढ़ा दिया है। समुद्री मार्गों के वैकल्पिक विकल्प और एयर कार्गो के माध्यम से सीमित तेल आपूर्ति की योजना पर भी काम चल रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार क्षमता बढ़ाने की योजना पहले ही बनाई जा चुकी है।

वैश्विक तेल बाजार और आम जनता पर असर

होर्मुज रूट के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और रिफाइनरी उत्पादों की उपलब्धता में कमी की संभावना है। फिलहाल सरकार आम जनता को राहत देने के लिए घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की पूरी कोशिश कर रही है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri