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छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरेंडर नक्सलियों की मौजूदगी: सदन के भीतर तीखे सवाल, बाहर मेल-मिलाप की तस्वीर

रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज का दिन असाधारण रहा। एक ओर 120 सरेंडर नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही देखी, वहीं सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, हंगामा और दो बार वॉकआउट देखने को मिला।

विधानसभा पहुंचे सरेंडर नक्सली

विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे 120 आत्मसमर्पित नक्सलियों में झीरम हमले से जुड़े चर्चित नाम भी शामिल रहे।

चैतूदादा – वर्ष 2013 के झीरम कांड का कथित मास्टरमाइंड। हाल ही में जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया। सतीश– सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM), जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इन्होंने 210 साथियों के साथ सरेंडर किया।

इन सरेंडर नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का अवसर बताया।

सरेंडर नक्सली रजमन भास्कर ने कहा कि जंगल में वे जनता से बातचीत करते थे, लेकिन विधानसभा की कार्यवाही को समझने का यह पहला मौका है और अब वे सादा जीवन जीना चाहते हैं।

वहीं रनीता ध्रुव ने कहा कि पहली बार रायपुर और विधानसभा देखी है, परिस्थिति बदलने पर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया और फिलहाल पुनर्वास में रह रहे हैं।

रूपेश ने कहा कि सदन की कार्यवाही पर जल्दबाजी में टिप्पणी करना उचित नहीं, लोकतंत्र में रहना जरूरी है और वे जनता के बीच रहकर काम करना चाहते हैं।

गुरुवार रात ये सभी डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर में शामिल हुए थे। सदन के बाहर मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों ने इनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं, जिसकी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।

सत्ता पक्ष के विधायकों के तेवर

आज सदन में सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही अपनी सरकार से तीखे सवाल किए।

परीक्षा में नकल और परीक्षा केंद्र का मुद्दा

विधायक प्रमोद मिंज, अजय चंद्राकर और रिकेश सेन ने ध्यानाकर्षण के जरिए कहा कि कई छात्र 15 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देने को मजबूर हैं। परीक्षा केंद्रों से वंचित रखने को उन्होंने नियमों का उल्लंघन बताया।

मंत्री गजेंद्र यादव ने आश्वासन दिया कि अगले शिक्षा सत्र से व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।

विपक्ष का हंगामा और वॉकआउट

फ्लाईऐश और उद्योगों पर सवाल

विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में अवैध फ्लाईऐश डंपिंग के मामलों और कार्रवाई की जानकारी मांगी।

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि पिछली सरकार की तुलना में 10 गुना अधिक कार्रवाई की गई है।

इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस अवधि की तुलना की जा रही है, उस समय लॉकडाउन लागू था। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने पहला वॉकआउट किया।

18 करोड़ के विकास कार्य पर विवाद

विधायक संगीता सिन्हा ने 18 करोड़ रुपये के कार्य की स्वीकृति मांगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि विभागीय प्रक्रिया के तहत घोषणा करना उचित नहीं।

इस पर भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के क्षेत्रों के काम नहीं करना चाहती। नारेबाजी के बाद विपक्ष ने दूसरा वॉकआउट किया।

किसानों की ट्रेनिंग पर सवाल

विधायक पुन्नूलाल मोहले ने फसल उत्पादन और खर्च को लेकर प्रश्न उठाया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि 900 किसानों को प्रदर्शनी और हाईब्रिड बीज संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

हालांकि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उन्होंने माना कि जमीनी स्तर पर सुधार की आवश्यकता है और सुझावों को लागू किया जाएगा।

लोकतंत्र और पुनर्वास का संदेश

एक ओर सदन के भीतर तीखी राजनीतिक बहस चलती रही, दूसरी ओर कभी बंदूक थामने वाले पूर्व नक्सली लोकतंत्र की कार्यवाही को देखते नजर आए।

यह दृश्य छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर का प्रतीक माना जा रहा है जहां एक तरफ राजनीतिक टकराव है, तो दूसरी ओर मुख्यधारा में लौटते लोगों के लिए पुनर्वास और संवाद की पहल भी दिख रही है।

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Tarendra Dansena

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