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सैकड़ों पीड़ित जन शामिल हुए एनटीपीसी-लारा के खिलाफ धरना में

ज्ञापन सौंपकर 10 दिन का समयावधि दी गई

रायढ़ । एनटीपीसी-लारा परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों एवं प्रभावित परिवारों की विभिन्न मांगों को लेकर आज लारा संघर्ष के नेतृत्व में एनटीपीसी-लारा के मुख्य द्वार के सामने निर्धारित धरना प्रदर्शन हुआ।

लारा संघर्ष के आह्वान पर हुए इस धरना प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले भू-विस्थापितों को न्याय दिलाना,समय रहते दर्जनों से ज्यादा लंबित समस्याओं का समाधान नहीं करना तथा जिला प्रशासन एवं एनटीपीसी परियोजना प्रबंधन की अनदेखी से हजारों पीड़ित परिवारों को हो रहे भीषण नुकसान के कारण प्रभावित परिवारों की स्थिति आर्थिक,सामाजिक और भौतिक रूप से बीते 15 वर्षों में कमजोर हो गईं जिससे अब पीड़ितों के परिजनों हर तरफ से असहनीय स्थिति में आ गय है के लिए अब आंदोलन ही एक रास्ता बचा था जिसके लिए फिर से इसकी शुरुआत एक दिवसीय धरना से प्रारंभ हुई।

एनटीपीसी लारा के विरूद्ध धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने बताया कि लगभग 15 वर्ष पूर्व जिला प्रशासन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत स्थानीय किसानों की भूमि अधिग्रहित कर एनटीपीसी-लारा परियोजना को सौंपी गई थी, परंतु आज तक भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमित रोजगार उपलब्ध कराया गया और न ही पुनर्वास नीति का पूर्ण रूप से पालन किया गया है,लारा संघर्ष ने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों द्वारा पूर्व में भी जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रमुख मांगें रखी गई थीं,जिनमें योग्यता अनुसार नियमित रोजगार उपलब्ध कराना,रोजगार उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता प्रदान करना,लैंड बैंक योजना के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एनटीपीसी को दी गईं जमीन के अंतर्गत नियमों की अवहेलना में जमीन मालिकों की मांग पर जमीन वापिस किए जाने की प्रक्रिया भी तथा भू-विस्थापितों की समस्याओं की जांच कर निराकरण करना शामिल है, लेकिन अब तक जिला प्रशासन, रायगढ़ द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

धरना प्रदर्शन के दौरान लारा संघर्ष द्वारा प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गईं जिसमें भू-विस्थापित परिवारों को योग्यता अनुसार नियमित रोजगार प्रदान किया जाए।

रोजगार उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दिया जाए जो कि बीते 15 वर्षों के बैंक ब्याज के साथ हो साथ में एनटीपीसी के प्रबंधन ने इस बेरोज़गारी भत्ता के घोटाले की जांच की जाय,जमीन वापसी के नियम का भी पालन त्वरित जिला भू-अर्जन अधिकारी, रायगढ़ के द्वारा प्रक्रिया में लाया जाय क्योंकि 2011 में तत्कालीन अमित कटारिया जिला कलेक्टर, रायगढ़ के द्वारा जमीनों का अधिग्रहण किया गया था,भूमि अधिग्रहण से संबंधित अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

एनटीपीसी गेट के सामने धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पीड़ित,भू-विस्थापित परिवारों, ग्रामीणों एवं लारा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने भाग लिया और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।

लारा संघर्ष मोर्चा ने ज्ञापन सौंपकर जिला कलेक्टर, रायगढ़ के प्रतिनिधि को सौंपकर आग्रह किया कि 10 दिवस के भीतर त्वरित एनटीपीसी के विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित हो अन्यथा भविष्य में आंदोलन स्वरूप वृहद होगा जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन तथा एनटीपीसी प्रशासन की संयुक्त रूप से होगी।
 

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Tarendra Dansena

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