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कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

वेतन विसंगति और सेवा-लाभ बहाली को लेकर बढ़ा विवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी-कर्मचारियों ने 5 दिवसीय कामबंद हड़ताल के बाद अब अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन विसंगति, सेवा-लाभ बहाली और पिछले 18 महीनों से लंबित देयकों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

कुलपति से वार्ता रही बेनतीजा

छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्वकर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के कुलपति से मुलाकात की, लेकिन चर्चा किसी ठोस समाधान पर नहीं पहुंच सकी।

संघ का आरोप है कि वार्ता के दौरान कभी मामला राज्यपाल, कभी वित्त विभाग और कभी राज्य शासन का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल दी गई। किसी भी मांग पर समयबद्ध निर्णय सामने नहीं आया।

कर्मचारियों की 7 सूत्रीय प्रमुख मांगें

GPF/NPS लाभों की पूर्ण बहाली विश्वविद्यालय विनियमों के अनुसार। चिकित्सा सहित सभी वैधानिक भत्तों को समान रूप से पुनः लागू किया जाए। CAS और उच्च वेतनमान योजनाओं की बहाली। विश्वविद्यालय अधिनियम-1987 के अनुरूप समतुल्य सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। तकनीकी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष और गैर-तकनीकी की 62 वर्ष तय की जाए। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन व चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। KVK कर्मियों को पूर्ववत उच्च शिक्षा की अनुमति दी जाए।

ICAR के निर्देश और वित्तीय विवाद

संघ का कहना है कि भारतीयकृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 1997 के मूल निर्देशों के अनुसार वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता का 75% अंशदान परिषद और 25% मेजबान संस्था द्वारा दिया जाना है।

लेकिन 20 अगस्त 2024 को जारी नए निर्देशों के बाद NPS अंशदान, पेंशन अनुदान और अन्य भत्तों में कटौती कर दी गई। वर्तमान में ICAR केवल मूल वेतन, महंगाई भत्ता और HRA दे रहा है।

विश्वविद्यालय का तर्क है कि देश में कुल 731 KVK संचालित हैं और नए नियमों के बाद सभी जगह पूर्ण वेतन देना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है।

न्यायालयीन हस्तक्षेप का हवाला

संघ के अनुसार, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 24 जून 2025 को स्थगन आदेश पारित किया था। इसके अनुपालन में विश्वविद्यालय ने 7 अगस्त 2025 को पत्र भी जारी किया, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि आदेशों को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया।

विश्वविद्यालय का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.6 करोड़ रुपए अपने संसाधनों से खर्च कर पूरा वेतन दिया गया। वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की सहायता मांगी गई है।

हड़ताल पर रोक और प्रशासन का पक्ष

विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में कन्या छात्रावास है और परीक्षाएं चल रही हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट किया कि KVK कर्मचारी गैर-शिक्षकीय संवर्ग में आते हैं, जिनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति केवल शिक्षकों के लिए है।

राजभवन घेराव की चेतावनी

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी सीधे राजभवन (लोकभवन) के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि केंद्रीय निर्देशों और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी से न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि कृषि विस्तार सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

यह मामला अब प्रशासन, राज्य शासन और केंद्र के बीच समन्वय की परीक्षा बन गया है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri