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छत्तीसगढ़ बजट सत्र: पूर्व मंत्री कवासी लखमा  को सदन में शामिल होने की अनुमति

रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में जेल में रहे पूर्व मंत्री कवासी लखमा को विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति मिल गई है। हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने न्यायालय के आदेश और प्रक्रियात्मक शर्तों के अनुरूप उन्हें सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी है।

विधानसभा अध्यक्ष ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति अंतरिम जमानत और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर दी गई है। साथ ही यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

गिरफ्तारी और जमानत

शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा की 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तारी हुई थी। लगभग एक वर्ष तक वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके। 3 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिली। इसके बाद विधानसभा की ओर से अभिमत मांगा गया और विचार-विमर्श कर उन्हें बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई।

23 फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी 2026 से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगा। कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र की शुरुआत 23 फरवरी को सुबह 11:05 बजे राज्यपाल रमन डेका जी के अभिभाषण से होगी। अभिभाषण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और आकाशवाणी से किया जाएगा।

24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओम प्रकाश चौधरी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे। 26 और 27 फरवरी को बजट पर सामान्य चर्चा होगी। 9 मार्च से 17 मार्च तक विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा निर्धारित है। 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर चर्चा और पारण किया जाएगा।

दो महत्वपूर्ण विधेयक भी आएंगे

सत्र के दौरान दो प्रमुख विधेयकों छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 और छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026 पर चर्चा की संभावना है। इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज रहने की उम्मीद है।

प्रश्न और प्रस्तावों की भरमार

बजट सत्र के लिए अब तक 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियम 139 के तहत 1 अविलंबनीय चर्चा सूचना, 13 अशासकीय संकल्प, शून्यकाल में 9 सूचनाएं और 112 याचिकाएं भी प्राप्त हुई हैं।

सत्र के दौरान अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य दीनदयाल सिंह पोर्ते के निधन का उल्लेख कर शोक प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी अहम माना जा रहा है। वित्तीय और विधायी एजेंडा व्यापक है, लेकिन पूर्व मंत्री कवासी लखमा की मौजूदगी को लेकर सदन के भीतर और बाहर चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में होने वाली बहसें राज्य की राजनीति और नीतियों की दिशा तय कर सकती हैं।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri