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रायपुर में सायबर फ्रॉड का सनसनीखेज मामला: फर्जी डिजिटल अरेस्ट कर 17 लाख से ज्यादा की ठगी

रायपुर। राजधानी छत्तीसगढ़ में सायबर ठगों ने दिल्ली एटीएस और सीबीआई अधिकारियों का झांसा देकर आरटीओ एजेंट और उसके पूरे परिवार को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और 17.15 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने मनी लांड्रिंग और आतंकवादियों को गोपनीय जानकारी देने के झूठे आरोप लगाकर परिवार को डराया और बैंक अकाउंट से रुपए ट्रांसफर करवाए।

पूरी कहानी पीड़ित की जुबानी

पीड़ित आरटीओ एजेंट शरद कुमार तिवारी (55) ने नवभारत को बताया कि 15 फरवरी की सुबह उन्हें कॉल आया और ठगों ने खुद को डीसीपी राजवीर सिंह शेखावत बताते हुए आधार और बैंक विवरण सही बताकर डराया। जांच के नाम पर कई सवाल पूछे गए और 17 फरवरी को डर के कारण उन्होंने बैंक से 17.15 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब एफडी की रकम को भी ट्रांसफर करने की बात कही गई, तब उन्हें फ्रॉड का संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस व अपने परिचितों को इसकी जानकारी दी।

पुलिस ने शुरू की जांच

एसीपी राजेन्द्रनगर नवनीत पाटिल ने बताया कि रकम महाराष्ट्र के अकाउंट में ट्रांसफर हुई है और मोबाइल नंबर व अकाउंट नंबर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। डीसीपी संदीप पटेल ने चेतावनी दी कि पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। इस तरह के कॉल और बैंक जानकारियों की मांग पर भरोसा न करें और अपने नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें।

विशेषज्ञ की सलाह: सतर्कता ही सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और सायबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने कहा कि सायबर क्राइम से बचाव के लिए जागरुकता सबसे बड़ी सुरक्षा है। पुलिस, सीबीआई, जज या एटीएस की तरफ से कभी भी मोबाइल कॉल या वाट्सएप के जरिए गिरफ्तारी वारंट नहीं भेजा जाता। ऐसे झूठे कॉल, धमकी और ठगी के प्रयासों में कभी विश्वास न करें। अगर किसी को ठगी का शिकार होना पड़े तो तुरंत नेशनल सायबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, समय रहते कार्रवाई होने पर रकम वापस आने की संभावना रहती है।

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Tarendra Dansena

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