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7 साल कैंसर से जंग, फिर UPSC में सफलता

महासमुंद के संजय डहरिया ने संघर्ष को बनाया अपनी ताकत

महासमुंद । छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के निवासी संजय डहरिया की जीवन यात्रा संघर्ष, साहस और दृढ़ निश्चय की अद्भुत कहानी है। सामान्य परिवार से आने वाले संजय ने जीवन में ऐसी चुनौतियों का सामना किया, जिन्हें देखकर कई लोग अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय हर मुश्किल को अपनी ताकत बना लिया और आखिरकार देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।

सात वर्षों तक कैंसर से जूझते रहे

संजय डहरिया की जिंदगी में सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। यह बीमारी उनके जीवन के सात महत्वपूर्ण वर्षों तक उनके साथ रही। लगातार इलाज, अस्पताल के चक्कर, शारीरिक कमजोरी और मानसिक तनाव के बीच भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। कई बार हालात इतने कठिन हो जाते थे कि सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल लगता था, लेकिन संजय का विश्वास और हिम्मत उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देते रहे।

लंबे उपचार और कठिन संघर्ष के बाद वर्ष 2018 में उन्होंने कैंसर को मात दी। यह उनके जीवन का ऐसा मोड़ था, जहां से उन्होंने नए सिरे से अपने सपनों को आकार देना शुरू किया।

बीमारी के बाद फिर से खड़े होने का साहस

कैंसर जैसी बीमारी से उबरना अपने आप में बहुत बड़ी जीत होती है। लेकिन संजय डहरिया ने यहीं रुकने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने यह तय किया कि वे अपने जीवन को एक बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित करेंगे और समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण करेंगे।

इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2022 में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। इस परीक्षा की तैयारी के लिए गहरी एकाग्रता, अनुशासन और लगातार मेहनत की आवश्यकता होती है। बीमारी से उबरने के बाद पढ़ाई की लय में लौटना भी उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई।

कठिनाइयों के बीच जारी रखी तैयारी

संजय ने सीमित संसाधनों और कई व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखी। उन्होंने नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। परिवार का सहयोग और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

उनकी तैयारी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह देश और समाज के लिए काम करने की भावना से प्रेरित थी। यही कारण था कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत में कभी कमी नहीं आने दी।

UPSC 2025 में हासिल की 946वीं रैंक

लगातार प्रयासों का फल उन्हें तब मिला जब उन्होंने UPSC 2025 की परीक्षा में 946वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि जीवन की सबसे कठिन लड़ाई जीतने के बाद हासिल की गई उपलब्धि है।

उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर मन में दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी परिस्थिति इंसान को उसके लक्ष्य से दूर नहीं कर सकती।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

संजय डहरिया की कहानी आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि असली जीत वही है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हासिल की जाए।

आज उनके गांव बेलटुकरी से लेकर पूरे महासमुंद जिले और छत्तीसगढ़ में उनकी सफलता पर गर्व का माहौल है। लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी उपलब्धि को संघर्ष और संकल्प की मिसाल बता रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

संजय डहरिया की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न आ जाए, अगर इंसान हार नहीं मानता और लगातार प्रयास करता रहता है, तो सफलता एक दिन जरूर उसके कदम चूमती है।

उनकी कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस विश्वास की जीत है जो कहता है — “जहां चाह होती है, वहां राह जरूर निकलती है।”

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Kanha Shastri

Kanha Shastri