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संजय बघेल मौत मामला: कांग्रेस जांच दल ने उठाए गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

रायगढ़, 18 जून। कोतरारोड़ थाना क्षेत्र के ग्राम नवापारा (नंदेली) निवासी संजय बघेल की जिला जेल में हुई संदिग्ध मृत्यु का मामला अब लगातार राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्री दीपक बैज के निर्देश पर गठित छह सदस्यीय जांच दल ने गुरुवार को रायगढ़ पहुंचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात की, घटनाक्रम की जानकारी ली तथा जिला जेल का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जांच दल ने प्रारंभिक तौर पर कई गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जांच दल के साथ खरसिया विधायक उमेश पटेल, जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। दल ने सबसे पहले नवापारा (नंदेली) पहुंचकर संजय बघेल के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान परिजनों ने घटनाक्रम को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि संजय बघेल को पुलिस घर से स्वस्थ अवस्था में लेकर गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु की सूचना दी गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान अवैध वसूली की मांग की गई थी तथा राशि दिए जाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। परिवार ने शव पर चोट के निशान होने की बात भी जांच दल के समक्ष रखी।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है, लेकिन कांग्रेस जांच दल का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस कार्रवाई के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा जाता है और बाद में उसकी मृत्यु हो जाती है, तो यह केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। ऐसी स्थिति में प्रशासन की जवाबदेही स्वतः तय होती है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

जांच दल ने जिला जेल का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान जेल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जेल में क्षमता से कहीं अधिक बंदियों को रखा जा रहा है। जिन बैरकों में लगभग 30 से 35 बंदियों के रहने की व्यवस्था है, वहां 60 से 65 बंदियों को रखा जाना सामने आया है। जांच दल ने इसे बंदियों के मानवाधिकारों, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए राज्य सरकार से जेल व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की।

इस अवसर पर विधायक उमेश पटेल ने कहा कि किसी भी नागरिक की अभिरक्षा में हुई मृत्यु लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन पर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना कांग्रेस की प्राथमिकता है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस जांच दल ने राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें भी रखी हैं। इनमें मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, मृतक की पत्नी को शासकीय नौकरी, दोनों बच्चों की निःशुल्क शिक्षा और पालन-पोषण की व्यवस्था तथा हृदय रोग से पीड़ित बच्चे के उपचार का पूरा खर्च शासन द्वारा वहन करने की मांग शामिल है। इसके अलावा प्रदेश की सभी जेलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर क्षमता से अधिक बंदियों को रखने की समस्या का स्थायी समाधान करने की भी मांग की गई है।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल एक परिवार के दुख और पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की लीपापोती, साक्ष्यों से छेड़छाड़ अथवा दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन करेगी।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा गठित जांच दल में सरायपाली विधायक चातुरी नंद को संयोजक बनाया गया है। दल में पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश, बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे, लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष नागेंद्र नेगी तथा जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष शेखर (शाखा) यादव को सदस्य बनाया गया है।

फिलहाल संजय बघेल की मौत को लेकर पुलिस, जेल प्रशासन और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच की दिशा और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आने वाले तथ्य इस मामले की सच्चाई को किस रूप में उजागर करते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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Taran

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