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शादी का झांसा देकर नाबालिग छात्रा को ले जाने का मामला : पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को सुनाई 20 साल के सश्रम कारावास की सजा

रायगढ़ । रायगढ़ जिले में नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने तथा उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी अजीत कुमार (23) को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 6 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष पॉक्सो न्यायाधीश देवेन्द्र साहू की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में कानून की सख्ती को दर्शाने वाला माना जा रहा है।

प्रकरण रायगढ़ के जूटमिल थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने परिवार के साथ क्षेत्र में निवास करती थी। 18 मई 2024 की सुबह वह स्कूल का फार्म भरने जाने की बात कहकर घर से निकली थी। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि वह कुछ समय बाद लौट आएगी, लेकिन देर शाम तक उसके वापस नहीं आने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने आसपास के इलाकों, परिचितों और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, किंतु कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद पीड़िता के भाई ने जूटमिल थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आशंका व्यक्त की कि किसी व्यक्ति द्वारा उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच प्रारंभ की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि छात्रा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के करछना थाना क्षेत्र स्थित लोहंदी गांव में मौजूद है। सूचना मिलने के बाद रायगढ़ पुलिस की एक टीम तत्काल प्रयागराज रवाना हुई। स्थानीय पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए टीम ने छात्रा को सुरक्षित बरामद कर लिया तथा आरोपी अजीत कुमार को हिरासत में लिया गया।

पीड़िता को सुरक्षित रायगढ़ लाने के बाद महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में उसका बयान दर्ज किया गया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने उससे विवाह करने का आश्वासन दिया था और इसी विश्वास में वह उसके साथ चली गई। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी ने अपने घर में उसके साथ कई दिनों तक शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता का बयान, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन, पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि नाबालिग बालिकाओं के विरुद्ध इस प्रकार के अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं तथा ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जा सके।

न्यायालय द्वारा सुनाई गई 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को महिला एवं बाल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों के संरक्षण के उद्देश्य से बनाया गया एक सशक्त कानून है और इस प्रकार के मामलों में त्वरित जांच एवं प्रभावी अभियोजन न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा कठोर दंड दिए जाने से समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ता है और अपराधियों में भय उत्पन्न होता है।

इस मामले में रायगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की जा रही है। सीमित समय में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दूसरे राज्य से पीड़िता को सुरक्षित बरामद करना पुलिस की सक्रियता और समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई की जा रही है तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कदम उठाए जाएंगे।

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में अभिभावकों और समाज दोनों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। बच्चों और किशोरों को सामाजिक, डिजिटल और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या भ्रम का शिकार न हों। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परिवार के भीतर संवाद और विश्वास का वातावरण बच्चों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri