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रायगढ़ में दर्दनाक घटना: करंट की चपेट में आकर दो हाथी शावकों की मौत, दो आरोपी गिरफ्तार; वन्यजीव सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई है। कुरकुट नदी के पास दो हाथी शावकों की मौत के मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खेत में सिंचाई के लिए लगाए गए बिजली के करंट की चपेट में आने से दोनों हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न केवल वन विभाग बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है।

जानकारी के अनुसार यह मामला घरघोड़ा वन परिक्षेत्र का है, जहां बुधवार दोपहर कुरकुट नदी के सोपानी क्षेत्र में दो हाथी शावकों के शव मिलने से हड़कंप मच गया। मृत हाथियों में एक की उम्र लगभग तीन वर्ष और दूसरे की उम्र करीब पाँच से छह वर्ष बताई जा रही है। नदी के किनारे और कठिन भू-भाग में शव मिलने के कारण शुरू में मौत के कारणों का स्पष्ट पता लगाना चुनौतीपूर्ण था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल जांच शुरू की। उप वन मंडलाधिकारी आशुतोष मंडावा के मार्गदर्शन में प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुछ ग्रामीणों ने खेत में सिंचाई के लिए नदी में मोटर लगाई थी और उसी दौरान करंट प्रवाहित हो रहा था। इसी करंट की चपेट में आने से करीब तीन दिन पहले दोनों हाथी शावकों की मौत हो गई थी।

जांच के बाद वन विभाग ने पाकादरहा निवासी रामकुमार राठिया (55 वर्ष) और धरम सिंह राठिया (38 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार है जिसकी तलाश जारी है। टीम ने घटनास्थल से सोलर प्लेट, तार, बैटरी, फेंसिंग वायर, वाटर पाइप सहित अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है और उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है।

इस संबंध में रायगढ़ के वन मंडलाधिकारी अरविंद पीएम ने बताया कि कुरकुट नदी में हाथियों की मौत की सूचना मिलते ही विभाग ने हर एंगल से जांच शुरू की थी। जांच में करंट लगने से मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और एक अन्य की तलाश की जा रही है।

वन्यजीव सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। खेतों की सुरक्षा या सिंचाई के लिए लगाए जाने वाले अवैध करंट और फेंसिंग न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि इससे कई निर्दोष वन्यजीवों की जान भी जा रही है। हाथी जैसे संवेदनशील और संरक्षित प्राणी का इस तरह करंट की चपेट में आना वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

वन विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवासों में मानव गतिविधियों के बढ़ने से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। यदि समय रहते सख्ती और जनजागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले समय में वन्यजीवों के लिए स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।

जागरूकता और सख्ती की जरूरत

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध करंट या फेंसिंग के माध्यम से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे खेतों की सुरक्षा के लिए ऐसे खतरनाक और गैरकानूनी तरीकों का उपयोग न करें।

दो मासूम हाथी शावकों की यह दर्दनाक मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रयास नहीं किए गए, तो जंगल के इन बेजुबान जीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ती रहेगी।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri