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रायगढ़ के अंतिम छोर से उठी चेतना की क्रांति कुरू बना नशामुक्ति आंदोलन का प्रतीक

खरसिया । जहां अक्सर विकास की रोशनी धीमी पड़ जाती है, उसी अंतिम छोर पर बसे ग्राम कुरू ने आज पूरे जिले को एक नई दिशा दिखा दी। खरसिया तहसील के इस गांव में आयोजित जन-जागरूकता शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की जीवंत गाथा बन गया जिसमें नशामुक्ति, वन्यजीव संरक्षण और जन-पुलिस साझेदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला।

इस परिवर्तन के केंद्र में हैं शशि मोहन सिंह, जिनके नेतृत्व में चल रहा “ऑपरेशन आघात” अब केवल अपराध नियंत्रण का अभियान नहीं रहा, बल्कि समाज को भीतर से बदलने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। जोबी क्षेत्र के 28 में से 24 गांवों का नशामुक्ति की ओर बढ़ना यह साबित करता है कि जब इच्छाशक्ति जागती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

लेकिन इस क्रांति की असली धुरी बनी है मातृशक्ति वे महिलाएं जिन्होंने चुप्पी तोड़कर समाज के सामने खड़े होने का साहस दिखाया। उन्होंने न केवल अवैध शराब के खिलाफ मोर्चा खोला, बल्कि अपने घरों और गांवों को नशे के अंधकार से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना है।

एसएसपी श्री सिंह ने भावुक शब्दों में कहा, “यह आंदोलन केवल नशा छोड़ने तक सीमित नहीं है, यह समाज को उसकी मूल चेतना में लौटाने की प्रक्रिया है। जोबी का मॉडल आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मार्गदर्शक बनेगा।”

इस दौरान पुलिस और जनता के बीच जो विश्वास और सहयोग देखने को मिला, वह किसी भी सशक्त समाज की नींव है। एसडीओपी प्रभात पटेल, चौकी प्रभारी लक्ष्मी राठौर और पूरी टीम ने जिस समर्पण से इस पहल को जमीन पर उतारा, वह सामुदायिक पुलिसिंग की एक उत्कृष्ट मिसाल बन चुका है।

कुरू की यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस जागरूक भारत की है जो अब खुद अपने भविष्य को गढ़ने के लिए उठ खड़ा हुआ है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri