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मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के एनआईसीयू में बढ़ी नवजात मृत्यु दर, तीन वर्षों में दो प्रतिशत तक इजाफा; स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

रायगढ़। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में बढ़ती मृत्यु दर ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में नवजातों की मृत्यु दर कम होने के बजाय लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईसीयू जैसी संवेदनशील इकाइयों में पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, आधुनिक उपकरणों और समय पर उपचार की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है। ऐसे में बढ़ती मृत्यु दर चिंता का विषय बन गई है।

जन्म के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे नवजातों, समय से पहले जन्मे शिशुओं, कम वजन वाले बच्चों तथा संक्रमण जैसी जटिल परिस्थितियों में जन्म लेने वाले शिशुओं को एनआईसीयू में भर्ती किया जाता है। यहां 24 घंटे विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में उपचार किया जाता है। प्रदेश के केवल चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ में ही एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुसार प्रत्येक एनआईसीयू बेड पर एक प्रशिक्षित नर्स की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, इन अस्पतालों के लिए अलग से पर्याप्त स्टाफ स्वीकृत नहीं होने के कारण उपलब्ध कर्मचारियों से ही व्यवस्था संचालित की जाती है। इसका सीधा असर उपचार की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। वर्ष 2023-24 में एनआईसीयू की मृत्यु दर 12.60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 13.90 प्रतिशत हो गई। इसके बाद 2025-26 में यह 14.70 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 2026-27 में यह 14.30 प्रतिशत दर्ज की गई। अर्थात तीन वर्षों में मृत्यु दर लगभग दो प्रतिशत तक बढ़ गई और पिछले दो वर्षों में औसतन प्रत्येक 100 नवजातों में से 14 की मौत दर्ज हुई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एनआईसीयू में मृत्यु दर का आकलन केवल प्रतिशत से नहीं किया जा सकता, क्योंकि वहां अत्यंत गंभीर अवस्था वाले नवजात भर्ती होते हैं। फिर भी यदि लगातार कई वर्षों तक मृत्यु दर में सुधार के बजाय वृद्धि दर्ज हो रही है, तो यह संसाधनों, मानवबल और उपचार व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता की ओर संकेत करता है।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में समय-समय पर आधुनिक मशीनों की कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी तथा आवश्यक संसाधनों के अभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। रायगढ़ सहित आसपास के जिलों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार गंभीर स्थिति में अपने नवजातों को इसी अस्पताल में उपचार के लिए लाते हैं। ऐसे में एनआईसीयू की लगातार बढ़ती मृत्यु दर स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग एनआईसीयू की कार्यप्रणाली का विस्तृत ऑडिट कर विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित करे, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाए तथा नवजात चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए, ताकि मासूम बच्चों की जान बचाई जा सके।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri