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बिलासपुर रेंज में पुलिसिंग का नया मॉडल: अब फाइलों नहीं, मैदान में दिखेगा सुशासन

रायगढ़ । बिलासपुर रेंज की समीक्षा बैठक में इस बार केवल अपराधों की संख्या या आंकड़ों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली को बदलने का स्पष्ट संदेश दिया गया। आईजी राम गोपाल गर्ग ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि अब सिर्फ कागजी कार्रवाई और औपचारिक बैठकों से काम नहीं चलेगा। पुलिस अधिकारियों को जनता के बीच जाकर, जमीन पर सक्रिय होकर सुशासन की मिसाल पेश करनी होगी। यह संकेत साफ है कि आने वाले समय में पुलिसिंग का मूल्यांकन केवल रिकॉर्ड से नहीं बल्कि जनता के विश्वास और परिणामों से होगा।

बैठक में हत्या और अन्य गंभीर अपराधों की विवेचना में हो रही देरी पर विशेष चिंता जताई गई। आईजी ने निर्देश दिए कि डीएनए जांच और एफएसएल रिपोर्ट जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। लंबे समय से यह देखा गया है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट में देरी के कारण कई संवेदनशील मामलों में न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। अब केस डायरी के नियमित अपडेट और जांच की सतत मॉनिटरिंग के निर्देश देकर पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

समीक्षा बैठक का सबसे चिंताजनक तथ्य 2374 लंबित मर्ग प्रकरणों का सामने आना रहा। यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक बोझ नहीं बल्कि न्याय प्रक्रिया की धीमी गति को भी दर्शाता है। कई मामले वर्षों पुराने बताए गए हैं। ऐसे में विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश यह संकेत देते हैं कि पुलिस अब पुराने मामलों को भी गंभीरता से निपटाने की तैयारी में है। यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है तो थानों में लंबित फाइलों का दबाव कम होने के साथ आम नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

बैठक में सुशासन तिहार शिविरों में प्राप्त शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी जोर दिया गया। साथ ही बाहरी राज्यों में जाने वाली पुलिस टीमों के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य करने की बात कही गई, ताकि किसी भी स्तर पर जवाबदेही तय की जा सके। यह प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नागरिक सुविधाओं को लेकर भी बड़े निर्देश दिए गए हैं। पासपोर्ट सत्यापन अब 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नागरिकों को बेवजह थाने न बुलाया जाए और सत्यापन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाया जाए। यह बदलाव आम लोगों को राहत देने वाला साबित हो सकता है।

इसके अलावा हाईवे पेट्रोलिंग को मजबूत करने और माइनिंग क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों का रिकॉर्ड संधारित करने के निर्देश भी दिए गए। इससे सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिक निगरानी दोनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

कुल मिलाकर बिलासपुर रेंज की यह समीक्षा बैठक केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि पुलिसिंग के नए दृष्टिकोण का संकेत मानी जा रही है, जहां फोकस “फाइल आधारित व्यवस्था” से हटकर “जनता आधारित सुशासन” पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri