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बिधाननगर कार्यक्रम विवाद: राष्ट्रपति मुर्मू की नाराजगी से गरमाई सियासत, ममता सरकार पर प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप

■ कार्यक्रम स्थल बदलने से शुरू हुआ विवाद

पश्चिम बंगाल ।पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू जी की उत्तर बंगाल यात्रा के दौरान प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय में बदलने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करना था, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कार्यक्रम स्थल को बदलकर बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित करना पड़ा।

■ राष्ट्रपति ने जताई नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने इस बदलाव पर आश्चर्य और नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बिधाननगर में पर्याप्त जगह उपलब्ध थी और वहां अधिक लोगों की भागीदारी संभव थी, फिर भी कार्यक्रम को वहां आयोजित करने की अनुमति क्यों नहीं दी गई, यह समझ से परे है। राष्ट्रपति का यह बयान सामने आते ही पूरे मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया।

■ मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता उनके लिए “छोटी बहन” जैसी हैं, लेकिन उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शायद मुख्यमंत्री उनसे नाराज़ हैं, क्योंकि उनके दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचा। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति के स्वागत के समय केवल स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और सिलीगुड़ी के मेयर ही मौजूद थे।

■ केंद्र सरकार ने मांगा स्पष्टीकरण

घटनाक्रम सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्र ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ और कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय में बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।

■ भाजपा का हमला, टीएमसी का बचाव

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान न करने का आरोप लगाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम स्थल में बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

■ केंद्र-राज्य टकराव के बीच बढ़ा विवाद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक कार्यक्रम स्थल के बदलाव तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है और ऐसे में राष्ट्रपति के कार्यक्रम से जुड़ा यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बन गया है।

■ अब राज्य सरकार के जवाब पर नजर

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। केंद्र द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अब सबकी नजर पश्चिम बंगाल सरकार के जवाब पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में और गर्मा सकता है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri