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बालोद जंबूरी विवाद पर कांग्रेस का बड़ा हमला: कांग्रेस प्रवक्ता अनादि शुक्ला ने उठाए गंभीर सवाल

जंबूरी आयोजन पर भ्रष्टाचार के आरोप

बिलासपुर । कांग्रेस प्रवक्ता अनादि शुक्ला ने बालोद जिले के दिल्ली मलिक गोरी में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस आयोजन को “उत्सव” नहीं बल्कि “सरकारी तमाशा” करार देते हुए कहा कि इसमें नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई गई हैं। शुक्ला ने आरोप लगाया कि करीब 10 करोड़ रुपये की राशि का बंदरबांट किया गया है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव रहा है।

टेंडर प्रक्रिया पर बड़ा सवाल: ‘अदृश्य शक्तिकौन?

अनादि शुक्ला ने सबसे गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री की नियुक्ति 13 दिसंबर 2025 को हुई, जबकि टेंडर प्रक्रिया 10 दिसंबर को ही पूरी कर ली गई। उन्होंने इसे “तारीखों का हेरफेर” बताते हुए कहा कि आखिर वह कौन सी “अदृश्य शक्ति” थी, जिसने मंत्री के पदभार संभालने से पहले ही करोड़ों के टेंडर तय कर दिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या छत्तीसगढ़ की सरकार किसी “रिमोट कंट्रोल” से संचालित हो रही थी।

GeM पोर्टल और निविदा नियमों की अनदेखी

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में न तो GeM पोर्टल के नियमों का पालन किया गया और न ही कोई पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद और ठेकों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से ठेके बांटे गए, जो सीधे-सीधे प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।

रायपुर से बालोद शिफ्ट करने पर संदेह

शुक्ला ने यह भी सवाल उठाया कि पहले रायपुर में प्रस्तावित इस आयोजन को अचानक बालोद क्यों स्थानांतरित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय केवल इसलिए लिया गया ताकि नियम-कायदों को दबाकर “चहेते ठेकेदारों” को लाभ पहुंचाया जा सके। उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से किया गया प्रतीत होता है।

अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय अनियमितता के आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खातों में सीधे राशि जमा कर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है। शुक्ला ने कहा कि बिना सक्षम अधिकारी या अध्यक्ष की नियुक्ति के करोड़ों रुपये के टेंडर पास होना अपने आप में गंभीर अनियमितता है। उन्होंने सवाल किया कि कार्यकारिणी परिषद की बैठक किसने बुलाई, टेंडर की शर्तें किसने तय कीं और फाइलों पर हस्ताक्षर किसके निर्देश पर हुए।

बैकडेट टेंडरऔर प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल

अनादि शुक्ला ने पूरे मामले को “बैक-डेट टेंडर घोटाला” करार देते हुए कहा कि यदि किसी परियोजना की प्रक्रिया अध्यक्ष या सक्षम अधिकारी के बिना शुरू की गई, तो वह पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि मंत्री का यह स्वीकार करना कि उनके आने से पहले काम शुरू हुआ, इस बात का संकेत है कि टेंडर प्रक्रिया को पहले से मैनेज किया गया था।

विधानसभा वॉकआउट पर कांग्रेस का पक्ष

विधानसभा में कांग्रेस के वॉकआउट को लेकर भी शुक्ला ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वॉकआउट कोई शौक नहीं था, बल्कि मजबूरी थी। जब सदन में गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय “मौन” और “गोलमोल जवाब” मिलते हैं, तो वहां बैठना जनता के साथ अन्याय है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग और सरकार को चेतावनी

अंत में कांग्रेस प्रवक्ता ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस “10 करोड़ के कथित बंदरबांट” और टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों का स्पष्ट जवाब नहीं देती, कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे की लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को जवाब देना ही होगा।

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