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बस्तर में कांग्रेस का स्वच्छता अभियान: चित्रकोट जलप्रपात में पर्यावरण और पर्यटन की सुरक्षा का संदेश

बस्तर । आज दीपक बैज के नेतृत्व में बस्तर की धड़कन और छत्तीसगढ़ के गौरव चित्रकोट जलप्रपात परिसर में एक व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान में चित्रकोट के सरपंच भंवर मौर्य, कांग्रेस कार्यकर्ता, युवा साथियों, महिला समूहों और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामवासियों ने भाग लिया।

सुबह से ही कार्यकर्ताओं ने जलप्रपात के आसपास फैले प्लास्टिक, बोतलें, पॉलिथीन, खाद्य पैकेट और अन्य कचरे को एकत्रित कर व्यवस्थित रूप से हटाया। कई स्थानों पर झाड़ियों और किनारों में जमा कचरे को भी साफ किया गया, जिससे पूरा परिसर पुनः अपनी प्राकृतिक भव्यता की ओर लौटता दिखाई दिया।

केवल पर्यटन स्थल नहीं, हमारी पहचान

चित्रकोट जलप्रपात को ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है। यह केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक समृद्धि, सांस्कृतिक आत्मगौरव और बस्तर अंचल की जीवनधारा का प्रतीक है। यहां प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। ऐसे में परिसर में फैली गंदगी न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि प्रदेश की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

सरकार पर तीखा सवाल

इस अवसर पर दीपक बैज ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेगा, तो जनप्रतिनिधि और जनता स्वयं आगे आकर अपनी धरोहरों की रक्षा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही और पर्यटन स्थलों की उपेक्षा के कारण प्रदेश की प्रतिष्ठा को आंच पहुंच रही है, जिसे कांग्रेस कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अभियान के दौरान स्थानीय लोगों को भी जागरूक किया गया कि वे प्लास्टिक और कचरा खुले में न फेंकें, तथा पर्यटकों से भी अपील करें कि वे प्राकृतिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें। यह केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाला जनआंदोलन बने—ऐसा संकल्प भी लिया गया।

राजनीतिक से अधिक सामाजिक पहल

इस अभियान ने यह संदेश दिया कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। चित्रकोट जलप्रपात की स्वच्छता के माध्यम से प्रदेश कांग्रेस ने पर्यावरण संरक्षण और जवाबदेही दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।

यह पहल केवल सफाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम है।

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Tarendra Dansena

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