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फर्जी निवास प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी का आरोप: स्थानीय युवाओं में रोष, जांच के निर्देश

रायपुर/राजनांदगांव, 21 फरवरी। छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि दूसरे राज्यों के कुछ अभ्यर्थी फर्जी निवास प्रमाण-पत्र बनवाकर राज्य कोटे की नौकरियों में चयन पा रहे हैं। यह मामला तब उभरा जब एसएससी–जीडी परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने लिखित शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की।

शिकायत में क्या कहा गया

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों से आए कुछ उम्मीदवारों ने छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण-पत्र तैयार करवा लिया और उसी आधार पर राज्यवार सीटों पर दावा ठोक दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि ऐसे मामलों में डाक से एडमिट कार्ड/चयन पत्र उन पतों पर भी पहुंचे, जहां संबंधित व्यक्ति का वास्तविक निवास नहीं है। इससे स्थानीय युवाओं के हिस्से की सीटें प्रभावित हो रही हैं।

प्रशासन का रुख

जिला प्रशासन ने कहा है कि यदि शिकायतों में प्रथमदृष्टया तथ्य मिलते हैं तो दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। अधिकारियों के अनुसार, राजस्व अभिलेख, आधार-लिंक्ड विवरण, और स्थानीय सत्यापन के जरिए निवास प्रमाण-पत्र की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित तहसीलों से रिपोर्ट तलब की जाएगी।

भर्ती प्रक्रिया और सीटों का मुद्दा

एसएससी–जीडी जैसी परीक्षाओं में राज्यवार सीटों का आवंटन होता है। यदि निवास प्रमाण-पत्र के आधार पर गलत तरीके से कोटे का लाभ लिया जाता है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सीमित सीटों के बीच किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे-सीधे स्थानीय युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है।

युवाओं में आक्रोश

प्रदेश के विभिन्न जिलों से युवाओं ने सोशल मीडिया और ज्ञापन के माध्यम से विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि रोजगार के अवसर पहले ही सीमित हैं, ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के सहारे चयन की खबरें मनोबल तोड़ने वाली हैं। कई संगठनों ने मांग की है कि चयनित उम्मीदवारों के निवास दस्तावेजों का व्यापक ऑडिट कराया जाए।

कानूनी पहलू

फर्जी दस्तावेज बनवाना और उसके आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करना दंडनीय अपराध है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत नियुक्ति रद्द करने के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सत्यापन तंत्र को और मजबूत करना समय की मांग है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का सुझाव है कि-

निवास प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बहु-स्तरीय सत्यापन से जोड़ा जाए। भर्ती से पूर्व रैंडम फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए। दोषी पाए जाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल, शिकायतों की जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय युवाओं की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

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Tarendra Dansena

Tarendra Dansena