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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: 8 दिनों में करीब ₹5 बढ़े दाम, आम जनता की जेब पर बढ़ा महंगाई का दबाव

रायपुर । देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। तेल विपणन कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दामों में वृद्धि करते हुए पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया है। पिछले 8 दिनों में हुई लगातार बढ़ोतरी के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹5 प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब, घरेलू बजट और बाजार की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।

देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई सहित अन्य महानगरों में भी ईंधन के दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। कई राज्यों में पेट्रोल पहले ही ₹100 प्रति लीटर के पार जा चुका है, जबकि डीजल भी तेजी से शतक की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, शिपिंग लागत में वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हैं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।

ईंधन महंगा होने का सबसे बड़ा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ता है। ट्रकों, बसों, टैक्सियों और मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ने से बाजार तक पहुंचने वाली हर वस्तु महंगी हो जाती है। सब्जियां, दूध, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं तक पर इसका प्रभाव दिखाई देने लगता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग पर इसका असर सबसे अधिक पड़ रहा है। रोजाना निजी वाहन से नौकरी या व्यवसाय के लिए आने-जाने वाले लोगों का मासिक खर्च अचानक बढ़ गया है। वहीं किसानों के लिए डीजल महंगा होने से सिंचाई, ट्रैक्टर और कृषि परिवहन का खर्च बढ़ने लगा है। इसका प्रभाव आने वाले समय में कृषि उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल केंद्र सरकार पर जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और वृद्धि संभव है। ऐसे में महंगाई का दबाव आम जनता के लिए और गंभीर चुनौती बन सकता है।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri