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पुरी के आकाश में अलौकिक दृश्य: जगन्नाथ मंदिर के ऊपर दिखा साल का पहला ‘ब्लड मून’

पुरी, ओडिशा: साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण ने दुनिया भर में कौतूहल जगाया, लेकिन इसका सबसे मनमोहक और आध्यात्मिक दृश्य ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ की नगरी में पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान आसमान में उभरे ‘ब्लड मून’ ने भक्तों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आध्यात्म और विज्ञान का संगम

जैसे ही पृथ्वी की छाया ने चंद्रमा को पूरी तरह से ढका, चंद्रमा का रंग धीरे-धीरे गहरा लाल (कॉपर रेड) हो गया। जगन्नाथ मंदिर के नीलमणि चक्र और लहराते पतित पावन बाना (ध्वज) के पीछे चमकते इस लाल चाँद ने एक ऐसा दृश्य निर्मित किया, जिसे देखकर लोग श्रद्धा से भर उठे।

क्यों खास था यह ‘ब्लड मून’?

खगोलीय विज्ञान के अनुसार, पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर चंद्रमा तक पहुँचती हैं, जिससे वह लाल दिखाई देता है। 2026 का यह पहला ग्रहण न केवल अपनी पूर्णता के लिए जाना गया, बल्कि इसकी दृश्यता पुरी जैसे तटीय क्षेत्रों में अत्यंत स्पष्ट थी।

मुख्य आकर्षण

• अद्भुत लालिमा: ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का रंग ईंट जैसा गहरा लाल दिखाई दिया।

• भक्तों का जमावड़ा: समुद्र तट और मंदिर के आसपास हजारों श्रद्धालु इस दुर्लभ नजारे के साक्षी बने।

• धार्मिक अनुष्ठान: मंदिर परंपराओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान विशेष ‘नीति’ और अनुष्ठान किए गए। सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए भक्तों ने भजन-कीर्तन में समय बिताया।

‘’यह देखना किसी दैवीय अनुभूति से कम नहीं था। जगन्नाथ जी के शिखर के ठीक पीछे लाल चाँद का होना ऐसा लग रहा था मानो ब्रह्मांड स्वयं मंदिर की आरती कर रहा हो।’’ – एक स्थानीय श्रद्धालु

मंदिर की परंपराएं और ग्रहण

जगन्नाथ मंदिर के पंचांग(कैलेंडर) के अनुसार, ग्रहण के स्पर्श से लेकर मोक्ष तक का समय विशेष महत्व रखता है। ग्रहण काल के दौरान मंदिर के गर्भगृह के द्वार बंद रहे और मोक्ष (समाप्ति) के बाद महाप्रभु का विशेष स्नान और शुद्धिकरण अनुष्ठान संपन्न किया गया, जिसके बाद भक्तों के लिए दर्शन पुनः प्रारंभ हुए। यह घटना सोशल मीडिया पर भी छाई हुई है, जहाँ लोग मंदिर के ऊपर ‘ब्लड मून’ की तस्वीरों को “अद्भुत” और “अलौकिक” बता रहे हैं।

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Kanha Shastri

Kanha Shastri